हिसार.
समाज से जो हमें मिलता है, समाजसेवा से वहीं लौटाते हैं। समाज ने हमें बहुत कुछ दिया है। चलना और बोलना सिखाया। शिक्षा दी और अन्य भौतिक जरूरतों को पूरा किया जो जंगल में संभव नहीं है। इन सभी सुविधाओं और संस्कृति को आने वाली पीढ़ी की खातिर बरकरार रखने के लिए इनवेस्टमेंट के रूप में समाजसेवा जरूरी है। जिस प्रकार जमीन में बीज डालने से कई गुणा लहलहाती हुई फसल मिलती है, उसी प्रकार समाजसेवा सुविधाओं और संस्कृति रूपी बीज है।
बुजुर्र्गो से विरासत मिले स्वच्छ वातावरण, स्कूल और अस्पताल आदि को संभालकर रखने के लिए समाजसेवा जरूरी है। इसके लिए न सिर्फ त्याग करना पड़ता है बल्कि अपने आप से ऊपर उठना पड़ता है। जो समाज से लिया है, उसके लिए समाजसेवा के रूप में कुछ देना भी जरूरी है।
समाजसेवा का काफी प्रभाव पड़ता है। इससे लोगों का न सिर्फ व्यवहार बदलता है बल्कि यह कई बीमारियों की जड़ को भी खत्म करती है। समाजसेवा से संतोष तो मिलता ही है, इससे युवाओं और आने वाली पीढ़ी को इस कार्य से जोड़ने में मदद भी मिलती है।
वर्तमान में बिखर रहे घर, परिवार व समाज के कारण हर कोई तनाव की जिंदगी जी रहा है। समाजसेवा से इन रिश्तों को बनाए रखा जा सकता और मिल-जुलकर रहा जा सकता है। देश में कितना ही भौतिक विकास हो जाए लेकिन जब तक समाज में व्यक्ति आपस में मिल-जुलकर नहीं चलेंगे, तब तक उसे विकास नहीं कहा जा सकता। -नरेन्द्र यादव, जिला समन्वयक, नेहरू युवा केंद्र, हिसार