कोटा/जयपुर.
सूर्य के मकर राशि में आने से जो संक्रमण होता है, उसे संक्रांति कहते हैं। इसी दिन सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण में आता है। मकर संक्रांति परंपरागत रूप से चौदह जनवरी को मनाई जाती है। इस बार सूर्य 14 जनवरी को रात 12.09 बजे मकर राशि में प्रवेश करेगा। इसलिए पुण्यकाल 15 जनवरी को माना जाएगा। लोग पतंगबाजी का आनंद दोनों दिन ले पाएंगे।
कोटा के आचार्य धीरेंद्र ने बताया कि संक्रांति का पुण्यकाल 15 जनवरी को सूर्यास्त तक रहेगा। राजस्थान ज्योतिष परिषद के महासचिव डॉ. विनोद शास्त्री ने बताया कि मकर संक्रांति का पुण्यकाल सोलह घंटे बाद तक रहता है। इस हिसाब से पुण्यकाल मंगलवार को शाम 4.09 बजे तक रहेगा। इसलिए पुण्यकाल में दान करना श्रेष्ठ माना जाता है। इस बार मकर संक्रांति प्रजा को धन देने वाली तथा पशुओं के लिए नुकसान दायक और महंगाई बढ़ाने वाली होगी।
संक्रांति का रूप
वाहन हाथी
उपवाहन गधा
वस्त्र लाल पोशाक व सफेद कंचुकी
धारण हाथ में लोहे का पात्र व दूध पीते हुए
वार नाम ध्वांशी
फल वैश्य व महाजनों को शुभ
नक्षत्र नाम मंदा जो बुद्धिजीवियों के लिए श्रेष्ठ
अवस्था प्रौढ़ अवस्था
पुष्प बिल्व पुष्प लिए
पतंगबाजी की डिक्शनरी
पतंगबाजी में वक्त के मुताबिक पेच बनाया जाता है, लेकिन इसकी डिक्शनरी में कुछ ऐसे शब्द हैं, जो हर पतंगबाज कभी न कभी काम में लेता ही है।
हल्के का पेच
ऊपर से दबाकर पेच काटना।
पट में खेंचना
उल्टा खींचकर पेच लड़ाना।
डबल देना
शह के दौरान सामने वाले की डोर से हटते हुए खींच मारना।
कूद लगाना
पेच के समय पतंग को तेजी से नीचे की ओर लाना।
खेंच मारना
पतंग को तेजी से खींचना।
लच्छा मारना
पतंग को तेजी से खींचकर उतनी ही तेजी से ढीली छोड़ना, खींच के पतंगबाज का अचूक हथियार है।
ढील छोड़ना पेच के समय डोर को धीरे-धीरे छोड़ना।
शह की चुटकी
शह के कारण तेजी के खेंच के साथ चुटकी देते हुए पीछे भागना।
तोड़मताड़ी
अपनी डोर से दूसरे के तंग फंसाकर पतंग खींचकर अपने घर ले आना।