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कहीं भरी कोठी कहीं खाली मुट्ठी

रायपुर. लैंड रिकार्ड विभाग के आंकड़ों को सही मानें, तो पांच जिलों में धान की उपज में भारी कमी आई है। कुछ जिलों में उत्पादन बढ़ा, तो कुछ में औसत से आधा रह गया है। उदाहरण के तौर पर, एक जिले में एक हेक्टेयर में 34 क्ंिवटल धान हुआ, तो दूसरे जिले में यह 13 क्विंटल में ही सिमट गया। जहां कमी हुई, उन जिलों को सरकार ने अब तक राहत नहीं दी है।

कुछ जिले ऐसे हैं, जिनमें धान का क्षेत्रफल ज्यादा है, फिर भी उत्पादन कम हो गया। राज्य में फसल का कितना उत्पादन हुआ और प्रति हेक्टेयर कितनी फसल हुई, इसकी रेंडम सैंपलिंग लैंड रिकार्ड (भू-अभिलेख) शाखा करती है। केंद्र को यही आंकड़ा भेजा जाता है। इस साल जो सैंपल लिए गए, उसके मुताबिक बंपर फसल है।

धमतरी के किसानों ने सर्वाधिक पैदावार की। उन्होंने प्रति हेक्टेयर 3483 किलो धान उगाया। सबसे कम उत्पादन कोरिया जिले में प्रति हेक्टेयर 1353 किलो आया। इस जिले में स्थिति सबसे खराब रही। राज्य का औसत उत्पादन 2216 किलो प्रति हेक्टेयर आया है। लेकिन पांच जिलों में उत्पादन औसत से काफी कम है। कोरिया ही नहीं, दुर्ग (1372 किलो प्रति हेक्टेयर), कांकेर (1590), कोरबा (1504) और सरगुजा (1862) में भी उत्पादन कम हुआ है।

इन आंकड़ों ने कृषि विभाग के कान खड़े कर दिए हैं। जहां तक बारिश का सवाल है, कोरिया और कवर्धा में औसत से कम बारिश हुई है। राज्य सरकार ने कोरिया और कवर्धा जिले सहित पेंड्रारोड इलाके को सूखाग्रस्त घोषित किया है। दुर्ग, कांकेर और सरगुजा में उत्पादन घटने का स्पष्ट कारण नहीं ढूंढ़ा जा सका। किसानों का कहना है कि इस साल शुरुआत में अच्छी बारिश हुई, लेकिन बाद में रुक-रुककर होने लगी।

इस वजह से धान के खेत में खरपतवार अधिक हुई। इससे उत्पादन प्रभावित हुआ। 11वीं पंचवर्षीय योजना में खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि कृषि भूमि सीमित है। कम जमीन में ज्यादा उत्पादन लेना पड़ेगा, तभी खाद्यान्न संकट दूर होगा। हालांकि कृषि विभाग ने इन आंकड़ों पर शंका जाहिर की है। कृषि संचालनालय ने दुर्ग जिले की रिपोर्ट को फिर से जांचने लैंड रिकार्ड को पत्र लिखा है।

कैसे होती है सैंपलिंग

राजस्व अधिकारी धान की सेंपलिंग करते हैं। राजस्व निरीक्षक और तहसीलदार कुछ गांवों में फसल कटाई कराते हैं। इसके लिए 5 गुणा 5 मीटर को मानक लिया जाता है। इसकी फसल काटकर अलग से मिंजाई की जाती है। जितना उत्पादन आता है, उसे चार से गुणा करने पर प्रति हेक्टेयर उत्पादन आ जाता है। सभी ब्लाक के आंकड़ों को मिलाकर जिले का औसत निकाला जाता है। इसी तरह राज्य के औसत उत्पादन का पता चलता है।

दावा बंपर उत्पादन का

खरीफ सीजन में 33.50 लाख हेक्टेयर में धान बोया गया था। राज्य में औसत उत्पादन 2216 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर आया है। इस हिसाब से उत्पादन 83 लाख टन हुआ है। यह पिछले साल से अधिक है। पिछले सीजन में रकबा 35.73 लाख हेक्टेयर था। औसत 2138 किलो प्रति हेक्टेयर के हिसाब से 76 लाख क्विंटल उत्पादन हुआ था।

रैंडम सैंपलिंग में कई बार ऐसा एरिया आ जाता है, जहां उत्पादन कम रहता है। दुर्ग को छोड़कर बाकी जिलों की रिपोर्ट ठीक है। दुर्ग के रिकार्ड को वेरीफाई करने कहा गया है।
—प्रतापराव कृदत्त, संचालक, कृषि





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