|
News
Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर. गरीबों तक चावल पहुंचाने की प्रक्रिया में अनेक स्तर पर चावल की कालाबाजारी रोकने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ेगी। गरीबों के चावल की कीमत कम होने से राशन माफिया उसका सबसे पहले लाभ लेने की जुगत में रहेगा। इस बात को देखते हुए ही चावल गोदाम से निकालने के पहले ही पैकेट बनाने का फैसला किया गया। चावल की पैकिंग में प्रति किलो करीब 25 पैसे का खर्च आएगा।
इस तरह सालभर में योजना पर लगभग 34 करोड़ 50 लाख रुपए खर्च हो जाएंगे। खाद्य विभाग के सचिव डा. आलोक शुक्ला ने बताया कि यह राशि योजना के लिए निर्धारित 837 करोड़ के अलावा होंगे। इस तरह योजना के क्रियान्वयन में 871 करोड़ रुपए से अधिक खर्च होंगे। संभावना इस बात की है कि खर्च की राशि 900 करोड़ रुपए तक जा सकती है। गरीबों को चावल देने की प्रक्रिया पूरी तरह कंप्यूटराइज्ड कर दी गई है।
किसानों से खरीदा जा रहा धान सहकारी सोसाइटी से या तो गोदाम भेजा जाएगा या फिर वहां से राइस मिलर्स को कस्टम मिलिंग के लिए दिया जाएगा। उसके बाद कस्टम मिलिंग से मिला चावल सीधे नागरिक आपूर्ति निगम के गोदामों में जाएगा। नागरिक आपूर्ति निगम के 100 गोदामों में चावल को रखने के बाद चावल की पैकिंग गोदामों में ही की जाएगी। खाद्य विभाग के पास प्रदेश की सभी 10 हजार 401 दुकानों के राशन कार्डे की जानकारी है।
इसलिए निगम के गोदामों से ही राशन दुकानों के लिए चावल सीधे भेजा जाएगा। प्रति कार्ड 35 किलो चावल भेजा जाएगा। उस महीने में जितना चावल बचेगा, उसके बारे में राशन दुकानदार को घोषणा पत्र जमा करना होगा। यानी 100 क्ंिवटल चावल में से 20 क्विंटल बच गया है तो अगले महीने केवल 80 क्विंटल चावल दिया जाएगा। खाद्य सचिव ने स्पष्ट किया कि हर दुकानदार का घोषणा पत्र आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत होगा।
यदि किसी दुकानदार ने गलत जानकारी भरी तो उसे जेल भेज दिया जाएगा। हर महीने 10 प्रतिशत घोषणा पत्र का भौतिक सत्यापन किया जाएगा। उस क्षेत्र के लोगों से जाकर पूछताछ की जाएगी कि वास्तव में चावल मिला कि नहीं। इसमें संबंधित क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों से राशन वितरण के संबंध में जानकारी ली जाएगी। राशन दुकानों के लिए ट्रक की रवानगी तभी होगी, जब उसकी जानकारी नेट पर डाल दी जाएगी। नेट पर डालने के बाद ही रसीद जारी होगी और ट्रक गंतव्य के लिए रवाना होगा। इस तरह चावल पर आनलाइन निगरानी की पूरी तैयारी की गई है।
सभी जिलों में उड़नदस्ते
चावल पर निगरानी के लिए सभी जिलों में उड़नदस्ते बनाए जा रहे हैं। सभी जिलों के कलेक्टरों से कहा गया है कि जिला बड़ा होने पर सब डिवीजनों में भी उड़नदस्ते गठित किए जाएं। उड़नदस्तों को दुकानों की निगरानी कर गड़बड़ी मिलने पर तत्काल कार्रवाई का अधिकार होगा।