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Chhattisgarh
Raipur Raipur जगदलपुर. लाठी के सहारे लकड़बग्घे से संघर्ष करते धनोरा निवासी नारायणसिंह प्रधान (55) ने जिस साहस का परिचय दिया, गांव के लोग उसकी हिम्मत की दाद देते नहीं थक रहे हैं। नारायणसिंह भले ही गंभीर रूप से घायल होकर महारानी अस्पताल में भर्ती हैं, लेकिन अभी भी लकड़बग्घे से लड़कर 21 बच्चों की जान बचाने का गर्व है। मलाल है तो सिर्फ एक मासूम कुमार राजपूत की जान नहीं बचा पाने का।
उनका कहना है कि थोड़ी पहले अगर वे पहुंच जाते तो कुमार की जान बच जाती। जगदलपुर धनोरा गांव में नदी किनारे रहने वाले किसान नारायणसिंह घरेलू कामकाज में व्यस्त थे। इसी बीच नदी में नहा रहे बच्चों के चीखने की आवाज सुनाई दी। वे फौरन लाठी लेकर नाले की ओर दौड़ पड़े। यहां धुरवापारा मिडिल स्कूल के 20-22 बच्चे रोज की तरह कोकोड़ी नाले में नहा रहे थे। इसी दौरान जंगल से नाले की ओर आए एक लकड़बग्घे ने बच्चों पर हमला कर दिया था।
अपनी जान की परवाह किए बगैर प्रधान लकड़बग्घे से भिड़ गए। बच्चों को बचाने की कोशिश में वे गंभीर रूप से घायल हो गए। बताया गया है कि यह लकड़बग्घा अक्सर कोकोड़ी नाले के आसपास देखा जाता है। केशकाल सीएचसी में प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें बुधवार की शाम यहां लाया गया। लकड़बग्घे से दो-दो हाथ करने के दौरान प्रधान को दोनों हाथ, जांघ और पेट में चोट आई हैं।
जानवर के नुकीले दांतों से घायल होने के बावजूद प्रधान ने हिम्मत नहीं हारी और लकड़बग्घे से जूझते रहे। उन्होंने बताया कि तब तक सभी बच्चे सकुशल स्कूल भवन पहुंच चुके थे। यहां से गांव वालों को अपनी ओर आता देख लकड़बग्घा जंगल के रास्ते भाग खड़ा हुआ। धुरवापारा स्कूल में प्राइमरी का विद्यार्थी कुमार राजपूत लकड़बग्घे के हमले में बुरी तरह घायल हो गया और इससे पहले कि उसे उपचार मिल पाता, उसकी सांसें थम गईं।
प्रधान ने बताया कि लकड़बग्घे ने राजपूत के सिर का एक हिस्सा खा लिया था। यहां से भागने के बाद लकड़बग्घे ने सवाला गांव के नजदीक डबरे में नहा रही एक महिला पर हमला किया। इस घायल महिला की हालत खतरे से बाहर है।