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उद्यान या उजाड़!

इंदौर. ये महज तीन उदाहरण हैं जब किसी कॉलोनी में उद्यान न होने या बेहद खराब स्थिति में होने की वजह से रहवासियों को इस तरह की परेशानी उठाना पड़ रही है। गार्डन न होने की वजह से कहीं बच्चों को बीच सड़क पर खेलना पड़ता है तो कहीं मॉर्निग व ईवनिंग वॉक के लिए लोग सड़क पर निकल पड़ते हैं।

यह दर्द शहर की ज्यादातर कॉलोनियों में रह रहे लोगों का है। शहर में इस समय 705 उद्यान हैं लेकिन इनमें से आधे भी ऐसे नहीं हैं जहां लोग सुकून के पल बिता सकें। निगम ने रहवासी संघों को उद्यान गोद दिए जाने की योजना तो शुरू की लेकिन उसे बहुत ज्यादा सफलता नहीं मिल पाई है। अब तक सिर्फ 65 गार्डन रहवासी संघों ने गोद लिए हैं। इनमें से भी ज्यादातर की हालत ठीक है। निगम हर साल सौ उद्यानों को संवारने के लिए योजना बनाता है लेकिन इन तीन सालों में अब तक बमुश्किल 250 उद्यानों को बेहतर बनाया जा सका है। उनमें से भी कुछ की स्थिति फिर खराब हो गई है।

ये कैसी मुश्किल..

स्वास्थ्यनगर निवासी के.सी. अत्रे बताते हैं गार्डन खराब होने की वजह से कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लोग यहां कचरा फेंक जाते हैं। फेंसिंग न होने के कारण यहां प्लांटेशन नहीं हो पाता और आवारा पशु घूमते रहते हैं। गाजरघास उगने के कारण यहां के रहवासियों को छोटी-मोटी बीमारियां होती रहती हैं। कचरे और बदबू के कारण ताजी हवा नहीं मिलती और मॉर्निग वॉक के लिए दो-दो किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। बीमारियों के डर से बच्चों को भी गार्डन में खेलने नहीं दिया जाता।

कई बार शिकायत की लेकिन नगर निगम कोई कदम नहीं उठा रहा है। सवरेदयनगर निवासी किशोर कोडवानी कहते हैं तीन वार्डो में करीब 20 गार्डन हैं जिनमें से 13 गार्डन खराब कह सकते हैं। कहीं ट्रैक नहीं है तो कहीं कचरा ही कचरा है। रात में हालात और भी ज्यादा खराब रहते हैं। गार्डन में अंधेरा छाया रहता है।

खेलने कहां जाएं..

बख्तावररामनगर (सी बलॉक) निवासी यश जैन बताते हैं कि गार्डन होने के बाद भी हम सड़क पर क्रिकेट खेलते हैं। कुछ दिन पहले तेज गति से आ रही गाड़ी से मेरे दोस्त का एक्सीडेंट हो गया, तब से मम्मी घर से बाहर नहीं निकलने देतीं।

पंचशीलनगर निवासी अमित कानूनगो कहते हैं हमारे खेलने के लिए कोई गार्डन नहीं है। स्कूल से लौटने के बाद गलियों में ही साइकिलिंग करते हुए मुझे चोट लग गई तब से घर पर खेलते हैं। क्रिकेट और फुटबॉल खेलने का बहुत मन करता है लेकिन हम कहां जाएं।

माली और पानी पर अटकी बात

नगर निगम के प्रयासों के बाद भी रहवासी संघों की अरुचि की एक बड़ी वजह पानी और प्रशिक्षित माली की कमी है। महापौर के समक्ष ज्यादातर रहवासी संघों ने यह मांग की है कि किसी भी गार्डन को सौंपते समय निगम वहां माली की नियुक्ति खुद अपनी तरफ से करे। साथ ही वहां बिजली और पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करे।

इसकी मुख्य वजह यह है कि ज्यादातर रहवासी संघों के पास बेहतर माली नहीं है और इसी वजह से कई गार्डन का मेंटनेंस बेहतर ढंग से नहीं हो पा रहा है। निगम उद्यान अधिकारी ए.यू. खान कहते हैं हम हर क्षेत्र में ज्यादा से ज्यादा लोगों से बात कर रहे हैं। उम्मीद है इस साल अन्य रहवासी संघ भी जनसहयोग के लिए तैयार हो जाएंगे। हमारा प्रयास है कि वर्ष 2008 तक 50 से ज्यादा उद्यानों को संवारा जा सके।

उद्यानों को संवारने की अनूठी पहल

महापौर डॉ. उमाशशि शर्मा कहती हैं हमने नीम उत्सव की शुरुआत की है। हर साल सौ गार्डन के डेवलपमेंट पर अमल हो ही रहा है। अब कोशिश की जाएगी कि सड़क निर्माण की तरह ही ज्यादा से ज्यादा गार्डन को संवारने का काम भी लोगों के सहयोग से हो। जल्द ही उन गार्डन की भी लिस्ट तैयार की जाएगी जिनकी अब तक सुध नहीं ली गई। वे कहती हैं हम इस बार बजट 5 से 6 करोड़ करेंगे। साथ ही इस बात के प्रयास ज्यादा होंगे कि रहवासी संघों के लिए किसी भी गार्डन को गोद लेने की प्रक्रिया सरल की जाए।





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