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जयपुर. राज्य सरकार हर साल योजना का आकार बढ़ाकर तो वाहवाही लूट लेती है, लेकिन वह योजना के तहत आवंटित राशि को शत प्रतिशत खर्च नहीं कर पाती। इतना ही नहीं, सरकार के पीडी खातों में पिछले कई साल से हर वित्तीय वर्ष के आखिर में लगभग डेढ़ हजार करोड़ रुपए बचे रह जाते हैं और ये खर्च नहीं हो पाते।
पिछले वित्त वर्ष में 1778 करोड़ 43 लाख रुपए बचे रह गए थे, जबकि 2005-06 में 1843 करोड़ 49 लाख रुपए बच गए थे। सरकार बजट प्रावधानों के तहत भी पूरी राशि खर्च नहीं कर पाती है। यह सिलसिला पिछले कई साल से चल रहा है। अर्थशास्त्रियों के अनुसार वाषिर्र्क योजना में पैसे के बचने से साफ है कि सरकार का योजना प्रबंधन ठीक नहीं है।
कांग्रेस के संयम लोढ़ा के एक सवाल के जवाब में विधानसभा के अंत:सत्र काल के दौरान राज्य सरकार ने बताया कि पीडी खाते योजनावार और जिलेवार नहीं बनाए जाते हैं। जिन बजट शीर्षकों में पीडी खाते खोले जाते हैं, उनमें गैर आयोजना या आयोजना, केंद्र प्रवर्तित योजना, संस्थापन एवं अन्य कलापों की राशि जमा की जाती है।