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इंदौर.
ग्रामीण बाजार के विकास के लिए केन्द्रीय पंचायत राज मंत्रालय ने इंदौर संभाग के छह प्रोजेक्ट्स पर सहमति दी है। इसमें इंदौर जिले में टिश्यूकल्चर यूनिट, बेड़िया (खरगोन) में मिर्ची पार्क, धार में रतनजोत से बायोडीजल और कपास से ऊर्जा पैदा करना, बुरहानपुर में केले से फायबर और फेब्रिक बनाने की यूनिट और पेटलवाद (झाबुआ) के टमाटर के साथ बड़वानी के पपीता व सौंफ -धनिये को एक्सपोर्ट क्वालिटी का बनाने के प्रयास शामिल हैं।
28 जनवरी को इंदौर में होने वाली बैठक में कुछ प्रोजेक्ट्स के एमओयू साइन होंगे। पंचायत राज मंत्रालय के सलाहकार और आरबीएच के प्रमुख अमित गोयल ने बताया रतनजोत के लिए आईकेएस टेक्नोलॉजी के साथ एमओयू साइन करेंगे। बेड़िया के मिर्ची पार्क के लिए ऑल इंडिया स्पाइस बोर्ड ने सहमति दी है।
उनसे जुड़ी कंपनियां लगभग 100 एकड़ जमीन पर यूनिट लगाएंगी। रतनजोत प्रोजेक्ट से लगभग 2 लाख परिवारों को रोजगार मिलेगा। बाकी हर प्रोजेक्ट्स से 50-50 हजार परिवारों को फायदा मिलेगा। अनुमान के मुताबिक पांच साल में 3.5 लाख लोगों को रोजगार मिलेगा। संभागायुक्त बसंतप्रताप सिंह मानते हैं की क्षेत्र में रोजगार और आमदनी दोनों बढ़ेगी।
इंदौर में टिश्यूकल्चर यूनिट
अधिक उत्पादकता और कीट मुक्त फसलों के लिए इंदौर में टिश्यूकल्चर यूनिट बनेगा। आरबीएच के डिवीजनल को-ऑर्डिनेटर शिशिर पंडित ने बताया इसके लिए देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी, एम.पी. काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी तथा एग्रीकल्चर कॉलेज से बात चल रही है।
बुरहानपुर के किसानों का केला गुणवत्ता के मानदंड पूरे नहीं करने के कारण ही अमेरिका और यूरोप एक्सपोर्ट नहीं होता। यूनिट का फायदा आलू, लहसुन, प्याज, कपास, गन्ना की फसल को भी होगा। संभाग में प्रोजेक्ट्स के क्रियान्वयन के लिए मालवा उत्पादकता परिषद को 'गेटवे एजेंसी' बनाया है। परिषद के अध्यक्ष सोमनाथ शर्मा ने बताया हमारा लक्ष्य पांच साल में 100 फीसदी उत्पादकता बढ़ाना है।