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भोपाल. शहर में ओरल (मुंह और जीभ) कैंसर के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की 'पापुलेशन बेस्ड कैंसर रजिस्ट्री' के आंकड़ों के मुताबिक भोपाल ने इस मामले में दिल्ली, चेन्नई, बंगलरू, मुंबई और अहमदाबाद को भी पीछे छोड़ दिया है।
जवाहर लाल कैंसर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल लगभग 262 ओरल कैंसर के मेजर और सुपर मेजर ऑपरेशन किए गए और यह आंकडा साल दर साल बढ़ रहा है। पहले जहां 40 साल से ऊपर के मरीज ओरल कैंसर के शिकार होते थे वहीं अब 20 से 35 साल के युवा इस कैंसर की गिरफ्त में सबसे ज्यादा हैं।
पान मसाले की आसान उपलब्धता है कारण
डाक्टर्स मरीजों की संख्या बढ़ने का मुख्य कारण पान-मसाले की हर जगह आसान उपलब्धता को मानते हैं। उनके मुताबिक शहर में पान-मसाना खाने वाले 100 बच्चों की जांच की जाए तो उनमें से 70 बच्चों में प्री-कैंसर के लक्षण मिल जाएंगे। निम्न से लेकर उच्च वर्ग तक के लोगों को यह कैंसर अपनी गिरफ्त में ले रहा है।
90 फीसदी मरीज आते हैं देर से
जवाहर लाल नेहरू कैंसर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में लगभग 90 फीसदी ओरल कैंसर के मरीज एडवांस स्टेज में आते हैं। जबकि उन्हें तकलीफें दो-तीन साल पहले से शुरू हो जाती हैं। लेकिन ऑपरेशन के डर और कैंसर न होने की संभावना के चलते इलाज के लिए नहीं आते। जब तकलीफ असहनीय हो जाती है तब कहीं वे इलाज के लिए आते हैं। ऐसे में सिर्फ 40 फीसदी मरीज ही पूरी तरह से ठीक हो पाते हैं।
प्रारंभिक अवस्था में कीमोथैरेपी से बच जाते हैं
जवाहर लाल नेहरू कैंसर हॉस्पिटल में सर्जन डा. दिलीप कुमारकर बताते हैं, जो मरीज अरली स्टेज में आ जाते हैं वे 90 फीसदी तक ठीक हो जाते हैं। क्योंकि इन्हें सिर्फ ऑपरेशन की जरूरत पड़ती है और उसके बाद कीमोथैरेपी नहीं करनी पड़ती है।
लेकिन दुखद पहलू यह है कि मरीज तकलीफ को दबाने के लिए अपनी मर्जी से अल्टरनेटिव दवाईयां लेते रहते हैं जिससे उनके ठीक होने की संभावना कम हो जाती है। तंबाकू, पान-मसाला, सुपारी और जर्दा आदि का सेवन पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा है। ओपीडी में आने वालों में से लगभग 90 फीसदी लोगों को कैंसर निकलता है।
25 से 35 सल के युवा कैंसर के शिकार
नवोदय कैंसर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के कैंसर सर्जन डा. श्याम अग्रवाल बताते हैं, ओरल कैंसर में जीभ, गाले और तालू में कैंसर हो जाता है। जिससे जीभ और तालू में सफेद और काले धब्बे नजर आने लगते हैं।
छाले अगर इलाज के बाद भी चार हफ्ते से ज्यादा जीभ में रहते हैं तो यह भी कैंसर के लक्षण होता है। इसके अलावा रोज च्यूंगम खाने से भी ओरल कैंसर होता है। डा. अग्रवाल कहते हैं, ओरल कैंसर के मामले में भोपाल देश में नंबर एक स्थान पर इसलिए भी है क्योंकि तंबाकू ज्यादातर एशियाई देशों में ही खाया जाता है।