|
भोपाल. चुनावी साल में सबको साधने में लगी सरकार अब विधायकों की सुविधा में और इजाफा करने की तैयारी कर रही है। मंत्रियों के बराबर तनख्वाह, लैपटॉप जैसी सुविधाएं देने के बाद अब विधायकों को मकान बनाने के लिए मिलने वाले कर्ज की सीमा ढाई गुना बढ़ाकर 20 लाख रुपए करने का प्रस्ताव तैयार हो रहा है। वर्तमान विधानसभा का कार्यकाल पूरा होने में करीब दस महीने ही बाकी बचे हैं। ऐसे में पिछले महीने ही विधायकों की तनख्वाह में दस हजार रुपए महीने का इजाफा लागू कर चुकी सरकार उनको कर्ज की सीमा बढ़ाकर लाभ देने का प्रस्ताव तैयार करा रही है। अभी प्रदेश में विधायकों को निजी मकान बनाने के लिए आठ लाख रुपए तक कर्ज लेने की सुविधा है।
उन्हें वाहन खरीदी के लिए भी पांच लाख रुपए तक लोन लेने की सुविधा है। यह कर्ज उन्हें चार फीसदी ब्याज दर पर मिलता है। इससे ऊपर का ब्याज सरकार चुकाती है। अभी तक ज्यादातर विधायकों की रुचि कर्ज से वाहन खरीदने में रही है।
संसदीय कार्य विभाग के सूत्रों के मुताबिक अब विधायकों को राजधानी में अचल सम्पत्ति खरीदने के लिए आठ लाख रुपए के बजाय 20 लाख रु.तक का ऋण दिलाए जाने की कवायद शुरू हुई है। दरअसल, राजधानी भोपाल के पाश इलाके माता मंदिर क्षेत्र में एमपी हाउसिंग बोर्ड विधायकों के लिए एक आलीशान कालोनी विकसित कर रहा है।
इस कालोनी में बंगलों की कीमत 20 लाख रुपए के करीब होने की संभावना है। सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने संसदीय कार्य विभाग को निर्देश दिए हैं कि विधायकों को मिलने वाले कर्ज की सीमा 20 लाख रुपए तक करने की व्यवस्था की जाए। जिसमें ब्याज दर पूर्ववत चार फीसदी सालाना ही रहे।
सूत्रों का कहना है कि संसदीय कार्य विभाग कर्ज की सीमा बढ़ाने के पक्ष में नहीं है। इसके पीछे कारण वर्तमान विधानसभा का कार्यकाल महज दस माह शेष रह जाना है। इस अवधि में विधायकों के वेतन से ऋण की वसूली का कम ही हिस्सा मिल पाएगा। जो विधायक दोबारा जीतकर नहीं आ पाएंगे, उनकी पेंशन राशि में से ऋण की वसूली में ज्यादा अर्सा लगेगा। उल्लेखनीय है कि विधायकों को कर्ज देने में चार फीसदी से ज्यादा ब्याज दर सरकार चुकाती है।
गौरतलब है कि विधायकों के वेतन-भत्ते 25 हजार रुपए महीने से बढ़ाकर 35 हजार रुपए कर दिया गया है। पूर्व विधायकों की पेंशन भी पांच हजार रुपए से बढ़ाकर नौ हजार रुपए महीना कर दी गई है। यह वृद्धि दिसंबर 2007 से लागू भी हो गई है। इस इजाफे से सरकारी खजाने पर हर साल छह करोड़ 63 लाख रुपए का अतिरिक्त भार आ रहा है। सुविधाओं में वृद्धि अकेला ऐसा मामला होता है, जिस पर सभी दल सहमत होते हैं। यह सुविधाएं बढ़ाने का प्रस्ताव भी सर्वसम्मति से पारित हुआ था।