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अजमेर. सेवानिवृत्त रेल कर्मचारी को अधूरी सूचना देने और सुनवाई का मौका नहीं देने पर मंडल के रेल अधिकारियों पर केंद्रीय सूचना आयोग की गाज गिर सकती है। आयोग ने राजस्थान में पहली बार टेलीफोन पर की सुनवाई में अजमेर के फरियादी का पक्ष सुना। केंद्रीय सूचना आयोग के लोक सूचना आयुक्त डॉ. ओपी केजड़ीवाल ने गुरुवार दोपहर 12. 10 बजे माली मोहल्ला निवासी नंदलाल शर्मा के घर पर फोन किया।
डॉ. केजड़ीवाल ने शर्मा से उनका पक्ष जाना। शर्मा ने उन्हें बताया कि मंडल रेल प्रबंधक दफ्तर के लोक सूचना अधिकारी एमएम गोयल की ओर से दी गई सूचनाएं अधूरी और गलत थंीं। विशेषज्ञ चिकित्सक की बजाय अधिकारी ने सामान्य चिकित्सकों के नाम दिए। पुनर्भरण के प्रश्न का भी अधूरा जवाब दिया। शर्मा ने कहा कि अपील अधिकारी एडीआरएम जीएल मीणा ने उन्हें बगैर व्यक्तिगत सुनवाई का मौका दिए निर्णय दिया।
शर्मा ने डॉ. केजड़ीवाल से रेल अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर पूरी जानकारी दिलाने का आग्रह किया। अजमेर मंडल की ओर से एडीआरएम जीएल मीणा, सीनियर डीएफएम और लोक सूचना अधिकारी एमएम गोयल और रेलवे अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आइपी केशवानी ने पक्ष रखते हुए कहा कि उन्होंने सभी जानकारी सही दी थी। शर्मा का कहना है कि डॉ. केजड़ीवाल ने उन्हें सुनने के बाद वांछित जानकारी पूरी दिलाने और रेल अफसरों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
क्या है मामला
सेवानिवृत्त मेल गार्ड नंदलाल शर्मा ने 30 जुलाई 07 को मंडल रेल प्रबंधक दफ्तर के लोक सूचना अधिकारी से रेलवे अस्पताल में चिकित्सा सुविधाओं के संबंध में 11 सूत्रीय जानकारी मांगी थी। अधिकारी ने उन्हें 11 में से आठ जानकारियां दीं। शर्मा ने आरोप लगाया कि जो जानकारियां दी गई वे भी गलत थीं। शर्मा ने इसकी अपील अपर मंडल रेल प्रबंधक जीएल मीणा से की। मीणा द्वारा उन्हें सुनवाई का मौका दिए बगैर फैसला देने पर शर्मा ने 6 सितंबर 07 को केंद्रीय सूचना आयोग में अपील की।