|
बोस्टन.चिकित्सा साहित्य में अवसादरोधी दवाओं की करीब एक तिहाई रिपोर्ट्स को कभी सार्वजनिक नहीं किया जाता। केवल इतना लिखा जाता है कि परीक्षण की गई दवा काम नहीं करती।
ओरेगोन हेल्थ एंड साइंस यूनिवर्सिटी की शोध टीम ने कहा कि जो थोड़ी बहुत रिपोर्ट प्रकाशित होती हैं, उनमें प्रतिकूल परिणामों को ऐसे प्रस्तुत किया जाता है जिससे दवा अपने वास्तविक रूप से कहीं अधिक प्रभावी लगे। यह अध्ययन न्यू इंग्लैंड जर्नल आफ मेडिसीन में छापा गया है।