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अतिक्रमण पर प्रशासन का हथौड़ा

सीकर. हर्ष में चार-पांच वर्षो से सरकारी जमीन पर हो रहे अतिक्रमणों को गुरुवार को ध्वस्त कर दिया गया। अतिक्रमण हटाने का किसी भी ग्रामीण ने विरोध नहीं किया। कुछ लोगों ने कई दिनों से सरकारी जमीन पर तार व पत्थर डालकर व दुकानें बनाकर अतिक्रमण कर रखा था। अतिक्रमणों को लेकर जिला प्रशासन को कई दिनों से ग्रामीणों की शिकायतें मिल रही थी।

दोपहर में एसडीएम महेंद्र शर्मा, तहसीलदार बनवारीलाल बासलीवाल व वन विभाग रेंजर महेश तिवाड़ी अपनी टीम के साथ पहुंचे और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की। जानकारी के मुताबिक, ग्राम सेवा सहकारी समिति के पास लोगों ने चाय व किराणा सामान की दुकानें बना रखी थी।

साथ ही टूरिज्म के लिए चयनित जमीन पर पत्थर डालकर अतिक्रमणकारियों ने मकान बनाने की तैयारी शुरू कर दी थी। अतिक्रमण को तोड़कर वहां से हटा दिया गया। तहसीलदार ने बुधवार को अतिक्रमणकारियों को नोटिस भी जारी किए थे। उन्होंने बताया कि आठ लोगों ने तारबंदी, पांच लोगों ने पत्थर डालकर तथा तीन लोगों ने लोहे की दुकानें बनाकर अतिक्रमण कर रखा था। कार्रवाई के दौरान कई प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे।

>> हर्ष से 16 अतिक्रमणकारियों के अतिक्रमण हटाए गए हैं। कई दिनों से शिकायतें मिल रही थी। जिसके कारण आज कार्रवाई की गई।
महेंद्र शर्मा, एसडीएम, सीकर

इनके हटाए अतिक्रमण
तहसीलदार ने बताया कि रिछपाल पारीक, मनोज पारीक, प्रकाश, रामकुमार गुर्जर, लालचंद गुर्जर, जगदीश, सुवालाल, देवकीनंदन, गुलझारी, बलवीर जाट, ओमप्रकाश, सुरेंद्र, मांगीलाल, सांवरमल बलाई, बनवारी व मनीष पारीक ने अतिक्रमण कर रखे थे, जिनको हटा दिया गया।

अतिक्रमण के पांव तले दबा सपना!
हर्ष की वादियों को हराभर करने की सरकारी योजना ने अतिक्रमण के पांव तले दबकर दम तोड़ा दिया। वन विभाग ने 1990 में ‘हर्ष ईको डेवलपमेंट’ योजना शुरू करके हर्ष को हरियाली की चादर ओढ़ाने का सपना देखा था। सपने को साकार करने के लिए हर्ष में करीब 70 हजार पौधे लगाए गए थे, मगर अतिक्रमणकारियों ने योजना को साकार होने से पहले ही रोंद दिया।

वन विभाग ने टूटते सपने को जिंदा रखने की पूरी कोशिश की, लेकिन वन विभाग की जमीन नहीं होने के कारण विभाग कुछ नहीं कर पाया। विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, योजना 1996 तक चली थी। योजना के तहत लगाए गए पौधों में दस प्रतिशत पौधे भी नहीं बच पाए। विभाग ने जिला प्रशासन से कई बार इसकी शिकायत भी की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो पाई।

जानकारी के अनुसार 70 हजार पौधों में से करीब 50 फीसदी पौधे अतिक्रमण की भेंट तो 40 फीसदी पशुओं के शिकार हो गए। विभाग का कहना है कि विभाग हर साल लाखों रुपए के पौधे लगाता है, मगर हर बार पौधे पशुओं अथवा अतिक्रमणकारियों की भेट चढ़ जाते हैं।

अतिक्रमण के कारण वन विभाग की कई योजनाएं सफल नहीं हो पा रही है। विभाग का कहना है कि अगर अतिक्रमण व पशुओं से मुक्ति मिल जाए तो हर्ष को हराभरा करने में कोई दिक्कत नहीं आएगी।

>> हर्ष में अतिक्रमण की काफी समस्या है। वन विभाग द्वारा लगाए गए पौधे भी अतिक्रमण व पशुओं की भेंट चढ़ जाते हैं।
महेश तिवाड़ी, रेंजर, वन विभाग

>> अतिक्रमणकारियों को कतई बख्शा नहीं जाएगा। शिकायत पर तुरंत कार्रवाई होगी।
बनवारीलाल, तहसीलदार





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