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22 बच्चों को राष्ट्रीय बाल वीरता पुरस्कार

नई दिल्ली. वर्ष 2007 के लिए 22 बच्चों को राष्ट्रीय बाल वीरता पुरस्कार के लिए चुना गया है। इनमें से चार बच्चे (तीन हरियाणा व एक मिजोरम से) अपने 22 बच्चों को राष्ट्रीय बाल वीरता पुरस्कार  साथियों को बचाने के प्रयास में जान गंवा चुके हैं। उन्हें मरणोपरांत यह पुरस्कार मिलेगा।

छत्तीसगढ़ के युक्तार्थ श्रीवास्तव को संजय चोपड़ा अवार्ड दिया जाएगा। मिजोरम की स्व. लालरमपुई को गीता चोपड़ा अवार्ड (मरणोपरांत) तथा गन्नौर (सोनीपत) की बबीता व अमरजीत को संयुक्त रूप से बाल वीरता के सर्वोच्च भारत अवार्ड के लिए चुना गया है।

भारतीय बाल कल्याण परिषद की अध्यक्ष गीता सिद्धार्थ ने शुक्रवार को प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि इस वर्ष देशभर से करीब ३क्क् आवेदन मिले थे। पुरस्कार पाने वालों में सर्वाधिक छह बच्चे हरियाणा से हैं। छत्तीसगढ़ के पांच, आंध्रप्रदेश के तीन, केरल के दो और राजस्थान, दिल्ली, उत्तरप्रदेश, मिजोरम, कर्नाटक व मणिपुर के एक-एक बच्चे को पुरस्कार दिया जाएगा। आंध्रप्रदेश के राएपल्ली वामसी, मणिपुर के कोनथाउजम बोनी सिंह व पानीपत के स्व. अमोल अघी (मरणोपरांत) बापू गायधानी अवार्ड के लिए चुने गए हैं।

इन बच्चों को प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह 24 जनवरी को अपने निवास पर आयोजित एक विशेष समारोह में पुरस्कार प्रदान करेंगे। साथ ही इन बच्चों को गणतंत्र दिवस की परेड में शाही सजधज वाले हाथियों पर सवारी का मौका मिलेगा।

इन्हें भी मिला वीरता पुरस्कार:
* राजस्थान: कांग्रेस कंवर
* छत्तीसगढ़: रवींद्र हलधर, मानस निषाद, रविकुमार झारिया व अवधेश कुमार झारिया
* हरियाणा: फरीदाबाद के अंकित राय, गुड़गांव के स्व. अभिषेक व स्व. सूरज (दोनों भाइयों को मरणोपरांत)
* दिल्ली: मेहर लेघा

- छत्तीसगढ़ के युक्तार्थ को संजय चोपड़ा अवार्ड
- मिजोरम की स्व. लालरमपुई को गीता चोपड़ा अवार्ड (मरणोपरांत)
- सोनीपत की बबीता व अमरजीत को भारत अवार्ड
- हरियाणा के छह व छत्तीसगढ़ के पांच बच्चों को मिलेगा पुरस्कार





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