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लंदन/ वॉशिंगटन.
ब्रिटेन ने वैज्ञानिकों को शोध के लिए मानव और पशुओं के संकरित भ्रूण बनाने की विवादास्पद योजना को हरी झंडी दे दी है। वैज्ञानिकों का दावा है कि इससे अल्जेमीर और पार्किसन जैसी कई बीमारियों के इलाज को गति मिलेगी। उधर अमेरिकी वैज्ञानिकों ने इंसानी त्वचा की कोशिकाओं से मानव भ्रूण का क्लोन तैयार करने में कामयाबी हासिल की है।
ब्रिटेन की sूमन फर्टिलाइजेशन एंड एंब्रायोलॉजी अथॉरिटी (एचएफईए) ने किंग्स कॉलेज लंदन और न्यूकैसल यूनिवर्सिटी को संकरित भ्रूण बनाने की अनुमति दी है। ये 'साइटोप्लाज्मिक' भ्रूण होते हैं। इनमें 99.9 फीसदी मानव और 0.1 प्रतिशत पशुओं के गुण होते हैं।
एचएफईए के फैसले का विरोध करने वाले कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि इससे मानव प्रजाति की गरिमा को ठेस पहुंचेगी।
कैसे बनेगा 'साइटोप्लाज्मिक' भ्रूण :
इस तकनीक में मानव कोशिकाओं को पालतू पशुओं या खरगोश जैसे प्राणियों के अंडाणुओं से मिला दिया जाता है। इस काम में गाय के अंडाणु सबसे बढ़िया पाए गए हैं, क्योंकि ये आसानी से उपलब्ध हैं।
न्यूकैसल यूनिवर्सिटी के डॉ. लाइल आर्मस्ट्रांग ने एचएफईए के फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे कुछ लाइलाज बीमारियों के इलाज को गति मिलेगी।
क्या होगा फायदा :
संकर भ्रूण के निर्माण को तैयार वैज्ञानिकों का कहना है कि उनके शोध कार्य से अल्जेमीर और पार्किसन जैसी लाइलाज बीमारियों का इलाज ढूंढ़ने में मदद मिलेगी।
मानव भ्रूण की क्लोनिंग का दावा :
कैलिफोर्निया की एक बायोटेक फर्म ने दावा किया है कि उसने व्यस्क इंसान की त्वचा की कोशिकाओं से मानव भ्रूण की क्लोनिंग की है। इस काम के लिए कंपनी के वैज्ञानिकों ने सोमैटिक सेल ट्रांसफर तकनीक (एससीएनटी) को अपनाया है।
इस अध्ययन के निष्कर्ष 'स्टेम सेल्स' नामक जर्नल के ऑनलाइन संस्करण में जाहिर किए गए हैं। वैज्ञानिकों का यह भी दावा है कि इस तकनीक से ऐसे बच्चे भी तैयार किए जा सकते हैं, जो एक-दूसरे के जेनेटिक कॉपी (नकल) होंगे। इसके अलावा इस तकनीक से पैदा होने वाले बच्चों के स्टेम सेल से पर्किसन और डायबिटीज जैसी बीमारियों का भी सफलतापूर्वक इलाज ढूंढा जा सकेगा।