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जुलाई से प्रदेश में सैनिक स्कूल

रायपुर. प्रदेश में सैनिक स्कूल खोलने रक्षा मंत्रालय ने मंजूरी दे दी है। इस आशय का पत्र मिलते ही पहला सत्र जुलाई से शुरू करने शिक्षा विभाग तैयारी में जुट गया है। स्कूल के लिए अंबिकापुर के पास ग्राम मेंड्राकला में खुलेगा। इसमें 6 वीं से 12 वीं तक पढ़ाई होगी। राज्य के पहले सैनिक स्कूल में केवल बालकों को प्रवेश मिलेगा। इसका पहला बैच 6 वीं क्लास का 60 सीटों वाला होगा। शासन मेंड्राकला के पास सैनिक स्कूल के लिए 40 एकड़ जमीन दी है।

नई बिल्डिंग इसी पर बनेगी। इसके लिए शासन ने बजट में 50 लाख रुपए का प्रावधान किया है। इसी सत्र से स्कूल खोलने पर बिल्डिंग की जरूरत होगी। फिलहाल आदिम जाति विकास विभाग के हास्टल का उपयोग करने पर विचार किया जा रहा है। इस स्थिति में हास्टल के लिए विकल्प तलाशना होगा।

नया भवन दो साल में

सैनिक स्कूल का नया भवन बनने में दो साल लगने की संभावना है। स्कूल में स्टाफ व मैनेजमेंट रक्षा मंत्रालय का ही होगा। इसका स्थापना व्यय करीब 2.50 करोड़ रुपए का होगा जो राज्य सरकार वहन करेगी। यहां देशभर के बच्चे 6 वीं से 12 वीं तक शिक्षा ले सकेंगे। स्कूल में एडमिशन के लिए प्रतियोगी परीक्षा होगी। इसमें 5 वीं पास बच्चे शामिल होगें। फिलहाल रीवां स्कूल के प्राचार्य स्कूल का प्रबंधन देखेंगे।

उन्होंने मेंड्राकला स्कूल में प्रवेश के लिए विज्ञापन भी जारी कर दिए हैं। फिलहाल छग के 80 बच्चे रीवां स्कूल में पढ़ रहे हैं। स्कूल खुलने पर वे सभी यहां पढ़ाई कर सकेंगे। इसके अलावा देश के अन्य हिस्सों से भी छात्र यहां आकर एडमिशन ले सकेंगे।

बैठक में होगा विचार

विशेष सचिव स्कूल शिक्षा विभाग मनौहर पांडे ने बताया कि रक्षा मंत्रालय के कर्नल डी. चौधरी और कर्नल आरएस नेहरा की टीम ने छत्तीसगढ़ में सैनिक स्कूल के लिए जून में दौरा किया था। तब उन्होंने स्कूल के लिए मेंड्राकला में प्रस्तावित स्थल का दौरा भी किया। नए सत्र से स्कूल खोलने के लिए मुख्य सचिव शिवराज सिंह ने 28 जुलाई को स्कूल शिक्षा, ट्राइवल, पंचायत व अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों की बैठक बुलाई है। इसमें भवन का इंतजाम मुख्य एजेंडा होगा।

नोडल अफसर नियुक्त

डीपीआई के ज्वाइंट डायरेक्टर लेखसिंह मरावी को को इसके लिए नोडल अधिकारी बनाया गया है। उल्लेखनीय है कि जोगी सरकार के समय मैनपाट में सैनिक स्कूल खोलने की योजना बनी थी जिसे अब को पर्यटन स्थल घोषित कर दिया गया है। बताया गया कि रक्षा मंत्रालय के अफसरों ने मैनपाट पर भी विचार किया, लेकिन नक्सली गतिविधियों की जानकारी मिलने पर उन्होंने सहमति नहीं दी।





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