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ताकि एड्स पीड़ित कोताही न बरतें

इंदौर. एमवायएच के एआरटी सेंटर में अप्रैल से एड्स की सेकंड लाइन थैरेपी शुरू हो सकती है। फिलहाल मरीजों को एक-डेढ़ हजार रुपए महीने की दवाई बाजार से खरीदना पड़ रही है। ऐसे में कई मरीज दवा लेने में कोताही बरतने लगते हैं।

एआरटी सेंटर पर अब तक करीब 2800 एड्स रोगी पंजीकृत हैं। इनमें से पांच से दस प्रतिशत मरीज ऐसे हैं, जिनके उपचार में प्रचलित फस्र्ट लाइन थैरेपी प्रभावी नहीं है। इन मरीजों को एक-डेढ़ हजार रुपए महीने की दवाई बाजार से खरीदना पड़ रही है, जबकि अन्य रोगियों को सेंटर से ही नि:शुल्क दवाइयां मिल जाती हैं।

रोगियों को ढूंढ़ने के लिए रखा अफसर

एआरटी सेंटर पर अब एक अफसर केवल अनियमित और दवाई लेना बंद कर चुके एड्स रोगियों को खोजने का काम करेगा।

पिछले हफ्ते ही इसके लिए केअर कॉर्डिनेटर की नियुक्ति हुई है। सेंटर इंचार्ज डॉ. वी.पी. पांडे केमुताबिक आठ-नौ महीने दवाई लेने पर मरीज को कुछ ठीक लगने लगता है तो कई मरीज दवाई लेना बंद कर देते हैं, जो नुकसानदेह है।





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