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सेना की निगरानी में होंगी विवि परीक्षा

ग्वालियर. कालेजों में परीक्षा के दौरान बढ़ती जा रही नकल की प्रवृत्ति और आपराधिक घटनाएं रोकने के लिए जीवाजी विश्वविद्यालय प्रशासन अब सेना, पुलिस और राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के साथ-साथ एनसीसी व एनएसएस के अधिकारियों की मदद लेगा। विवि के इस निर्णय पर कार्यपरिषद ने शुक्रवार को हुई बैठक में मुहर लगा दी। निर्णय पर यदि अमल किया गया तो जीविवि संभवत: देश का पहला संस्थान होगा।

कुलपति प्रो. एके कपूर की अध्यक्षता में हुई बैठक में तय किया गया कि छामापार दल में ऐसे अतिथि शिक्षकों को भी शामिल किया जाए जिनकी सेवाएं पांच साल से अधिक हो चुकी हैं। इसके अलावा सेना, पुलिस, राज्य प्रशासनिक सेवा और विवि सेवा के कार्यरत अथवा सेवानिवृत्त अधिकारियों की मदद भी ली जा सकेगी। अनुचित साधन निर्णायक समिति में कार्यपरिषद सदस्य पुष्पा चौहान, प्राचार्य डॉ. एसके जैन व प्रो. एके जैन को मनोनीत किया गया।

उल्लेखनीय है कि नकल पर लगाम कसने के लिए विवि प्रशासन मुख्य परीक्षा से पूर्व तरह-तरह के निर्णय लेता रहा है उसके बावजूद भी नकल की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। हाल ही में शासकीय एमजेएस कालेज भिण्ड परीक्षा केन्द्र पर असामाजिक तत्वों ने छापामार दल पर जानलेवा हमला किया था। जांच के बाद यह मामला अभी शासन स्तर पर विचाराधीन है।

निजी कालेज संचालकों पर लगाम कसने के उद्देश्य से निर्णय लिया गया कि विवि अधिनियम के अनुसार शिक्षकों की नियुक्ति न करने वालें कालेजों में, स्नातकोत्तर स्तर के पाठयक्रम संचालन की संबद्धता नहीं दी जाएगी। बैठक में, दीक्षांत समारोह, अध्ययनशालाओं के लिए कम्प्यूटर्स, केन्द्रीय ग्रंथालय रीडिंग रूम हेतु सत्र 2007-08 में पांच लाख व 2008-09 में तीन लाख रुपए की पुस्तकें खरीदने हेतु वित्तीय स्वीकृतियां भी दी र्गइ।





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