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हस्तशिल्प और हर्बल ने लुभाया बायर्स को

ग्वालियर.gएमपी एक्सपोर्टेक 2008 में शामिल 38 देशों के बायर्स और डिप्लोमेट्स को मप्र के हर्बल प्रॉडक्टस और हस्तशिल्प खासा लुभा रहे हैं। उत्पादों के हिसाब से पांच भागों में बांटे गये एक्सपोर्टेक में ये दोनों ही सेक्टर चर्चा में रहे। आयोजन का आज दूसरा और बिजनिस सेशन का पहला दिन था।

बिजनिस सेशन में फार्मास्युटिकल हर्बल तथा आयुर्वेदिक मेडिसिन के साथ-साथ हैण्डलूम, हैण्डीक्राफ्ट और खाद्य प्रसंस्करण विषयों पर सेमीनार आयोजित किये गये। इनमें व्यापारियों और खरीदारों के साथ-साथ विशेषज्ञों ने उत्पादों की गुणवत्ता से लेकर बाजार में उनकी संभावनाओं पर भी खुलकर चर्चा की।

ग्वालियर के कालीन ने लुभाया :

लीबिया से आये शीबा हेण्डलूम एण्ड कारपेट कंपनी के चेयरमैन शानूजी अहमद ने ग्वालियर के कालीन और फर्नीशिंग उत्पादों की खरीदारी में दिलचस्पी दिखाई।

इसी तरह पनामा के अल्फा ट्रेडिंग कंपनी की एलिसन आटवे को मृगनयनी एम्पोरियम के फर्नीशिंग उत्पाद पसंद आये। उनकी ओर से बाघ और वाटिक वस्त्रों के लिए क्रयादेश मिलने की संभावना है।

इ`ाडोर की कोम एलोगा सेमा एसए के प्रेसीडेंट मारियो रूपेन डोनोसो ने फर्नीशिंग वस्त्रों की खरीददारी में दिलचस्पी दिखाते हुए सैम्पल एकत्र किये हैं। इसी तरह पनामा, डोमिनिकन रिपब्लिक, मोरक्को, तंजानिया, लीबिया, सूडान और नेपाल के बायर्स ने हैण्डलूम और हैण्डीक्राफ्ट में दिलचस्पी दिखाई है।

चीन को भाया बेसन, फ्रांस को काबुली चना :

भारत स्थित चीनी दूतावास के सेकेण्ड सेकेट्ररी पेन हुयनिंग ने चीन में डबल डायमंड बेसन की अच्छी मांग की संभावना व्यक्त की।

उन्होंने इसके लिए चीन से अच्छे क्रयादेश दिलवाने का भरोसा भी दिलाया। इसी तरह फ्रांस से आये सेमसन मेर्जिन और जैन ल्यूस लामू ने हल्दी, मिर्ची और काबुली चना खरीदने की इच्छा व्यक्त की। इनका कहना था कि फ्रांस में इन चीजों की अच्छी खपत हो सकती है।

इन दोनों ने तेजस्विनी महिला गृह उद्योग द्वारा तैयार की जा रही अगरबत्ती क्रय करने में भी रुचि दिखाई।

खुलकर की चर्चा, दिये सुझाव

एमपी एक्सपोर्टेक 2008 में शामिल विदेशी प्रतिनिधियों ने मप्र के व्यापारियों और उत्पादकों के उत्पादों पर कुलकर चर्चा की और सुझाव दिये। पेनल डिस्कशन के दौरान प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थो के संबंध में हुई चर्चा में मप्र कृषि विकास निगम के प्रबंध संचालक वी निरंजन, खादी ग्रामोद्योग बोर्ड के प्रबंध संचालक अशोक नरोन्हा आदि शामिल थे। खाद्य पदार्थो के मामले में सउदी अरब, भूटान, वियतनाम, फ्रांस, युगांडा, बेलारूस, केन्या, इजरायल, लीबिया, कुवैत और मारीशस के बायर्स ने रुचि दिखाई।

फार्मास्युटिकल्स श्रेणी में लघु उद्योग निगम के प्रबंध संचालक एसके मिश्रा, निकोलस पीरामल इंडिया लिमिटेड के प्रेसीडेंट एके भट्ट, लघु वनोपज निगम के प्रबंध संचालक आरके दवे, देविका हर्बल के योगेश खरब आदि ने प्रदेश में फार्मास्युटिकल और आयुर्वेदिक औषधियों के संबंध में असीमित संभावनाों पर चर्चा की।

चर्चा के दौरान बाहर से आये हुए प्रतिनिधियों ने आयुर्वेदिक उत्पादों में भारी धातुओं की अधिकता पर चिंता जताते हुए उनकी पैकेजिंग में अंतरराष्ट्रीय मानकों का ध्यान रखने का सुझाव भी दिया। हैण्डलूम और हैण्डीक्राफ्ट के पैनल डिस्कशन में एडिशनल डायरेक्टर वस्त्र मंत्रालय भारत सरकार देवेन्द्र सिंह, मप्र हस्त शिल्प एवं हथकरघा निगम के महाप्रबंधक नगेन्द्र मेहता ने शिरकत की। इन लोगों ने विदेशी बायर्स को सिल्क के बारे में बताया।

आज इंजीनियरिंग कैटेगरी पर चर्चा

आयोजन के अंतिम दिन 19 जनवरी को इंजीनियरिंग उत्पादों पर पैनल डिस्कशन होगा। इसमें चेम्बर आफ कामर्स के उपाध्यक्ष राधाकिशन खेतान इंजीनियरिंग एक्पोर्ट प्रमोसन काउंसलिंग के रीजनल डायरेक्टर एस डोले और अन्य सदस्य शामिल होंगे।





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