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भोपाल. सरकारी अस्पतालों की दशा-दिशा सुधारने की सरकारी कवायद महज कागजी खानापूर्ति बनकर रह गई है। मंत्री-अधिकारी के दौरे के बाद कुछ दिनों तक तो हालात में सुधार आ जाता है, लेकिन उसके बाद स्थिति जस की तस हो जाती है।
स्वास्थ्य विभाग ने हाल ही में डाक्टरों के ड्यूटी टाइम में बदलाव कर मरीजों की बेहतरी के लिए कदम उठाए थे, लेकिन वास्तविकता की धरातल पर यह प्रयास पूरे नहीं हो सके। स्वास्थ्य विभाग ने तीन-चार महीने पूर्व डाक्टरों का ड्यूटी टाइम नए सिरे से निर्धारित किया था, जिसके हिसाब से उन्हें सुबह 8 से शाम 4 बजे तक अस्पताल में मौजूद रहकर मरीजों को देखना है।
इससे पहले डाक्टरों का ड्यूटी टाइम दो शिफ्टों में था, जिसमें पहली शिफ्ट सुबह 8 से दोपहर 1 बजे तक और दूसरी शिफ्ट शाम को 5 या 6 बजे से दो घंटे की रहती थी। हाल में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने इंदौर के महाराजा यशवंतराव चिकित्सालय का निरीक्षण किया तो उसके बाद चिकित्सा शिक्षा मंत्री गौरीशंकर शेजवार ने गांधी मेडिकल कालेज से संबद्ध हमीदिया अस्पताल का दौरा किया।
इन दोनों ही निरीक्षणों में घोर लापरवाही देखी गई। उनके निर्देश के बाद इन अस्पतालों की स्थिति में सुधार तो हुआ, लेकिन अन्य अस्पतालों में अभी भी किसी औचक निरीक्षण का इंतजार हो रहा है। जब दैनिक भास्कर ने राजधानी के चार प्रमुख अस्पतालों का मौका निरीक्षण किया तो जेपी, काटजू और सुल्तानिया जनाना अस्पताल में स्थिति बदतर ही नजर आई।
इन अस्पतालों में रोजाना दूर-दराज से सैकड़ों मरीज इलाज के लिए आते हैं। उन्हें कभी डाक्टर नहीं मिलते तो कभी दवाइयां। मंत्री के ताजा दौरे के कारण हमीदिया अस्पताल में व्यवस्था ठीक-ठाक दिखी।