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कोटा. मौसम में आए परिवर्तन के साथ ही शुक्रवार से शहर में चेंपा का प्रकोप शुरू हो गया। लोग चेंपा से अपने आप को बचाते हुए दुपहिया वाहन चला रहे थे। तापमान बढ़ने के कारण चेंपा होने लगे हैं, लेकिन जैसी ही गर्मी बढ़ने लगेगी ये मरते जाएंगे।
अचानक हुए चेंपा के बढ़ने का लोगों को अंदाजा नहीं था, इसलिए इससे बचने की तैयारी भी नहीं कर पाए थे। मुंह पर रूमाल बांध कर और आंखों पर चश्मा लगाकर दुपहिया वाहन चालकों ने अपने आप को बचाया। जिसके पास यह दोनों साधन नहीं थे, वे एक हाथ से चेंपा से बचने का प्रयास कर रहे थे।
ऐसे बढ़ता है चेंपा
‘चेंपा’ कीट की एक ही प्रजाति होती है और यह तीन तरह से बढ़ता है। कृषि वैज्ञानिक डा. अरुण शर्मा ने बताया कि ‘चेंपा’ सिकुड़कर दो भागों में बंट जाता है। सर्दी कम होते और तापमान में हल्की बढ़ोतरी होने के साथ ही चेंपा बढ़ने लगते हैं। यह मौसम इनके लिए उपयुक्त होता है। सरसों की जो फसल फ्लावरिंग स्टेज पर है, उसे भी ये नुकसान पहुंचा सकते हैं। फरवरी के अंत तक गर्मी बढ़ने के साथ ही ये खत्म भी हो जाएंगे।
चेंपा से नुकसान
आंखों में प्रवेश करने पर खुजली। कई मौकों पर आंखें लाल हो जाती हैं। त्वचा पर चिपकने के बाद काटता है।
आरंभिक स्टेज पर पौधों की पत्तियों के लिए हानिकारक। पत्ती में स्टोमेटा बनना रोक देता है। पौधों की श्वसन क्रिया के लिए नुकसान-दायक। क्लोरोफिल को हानि पहुंचती है।
तापमान गिरा, अब काटने लगी धूप
तापमान में बढ़ोतरी होते-होते शुक्रवार को फिर से अधिकतम तापमान में फिर से कमी हो गई। दूसरी ओर गुरुवार की तुलना में शुक्रवार का न्यूनतम तापमान बढ़ गया।
मौसम विभाग के अनुसार शुक्रवार को अधिकतम तापमान 26.7 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 16.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। जबकि गुरुवार को अधिकतम तापमान 29.4 और न्यूनतम तापमान 13.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ था।
शुक्रवार को बादल नहीं छाने और आसमान साफ रहने से दिन के तापमान में एकदम गिरावट हो गई। गुरुवार की तुलना में शुक्रवार को अधिकतम तापमान में 2.7 डि.से. की गिरावट हुई, जबकि न्यूनतम में 2.8 डि.से. की वृद्धि हुई है।