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Shekhawati Shekhawati सीकर. राज्य सरकार प्रदेश के एक लाख पंचायतराज शिक्षकों के बकाया डीए व चयनित वेतनमान के करोड़ों रुपयों पर कुंडली मारे बैठी है। बात केवल वसुंधरा राजे सरकार की ही नहीं है, बल्कि पूर्ववर्ती सरकार ने भी शिक्षकों को इस मामले में टरकाया था। इस अधरझूल के बीच प्रकरण दस साल से लंबित है।
अकेले शेखावाटी के नौ हजार शिक्षकों के इस मद में करीब नौ करोड़ रुपए अटके पड़े हैं। बकाया भुगतान की मांग को लेकर इस बार शिक्षक आर-पार की लड़ाई के मूड में दिख रहे हैं। चुनावों से पूर्व भाजपा की ओर से शिक्षकों की इस मांग को पूरा करने का उल्लेख चुनावी घोषणा पत्र में भी किया गया था।
अब तक इस संबंध में कुछ सकारात्मक पहल नहीं होने पर चुनावी वर्ष में शिक्षक और पंचायत संगठनों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी कर ली है। जिले में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के प्रस्तावित दौरे को लेकर पंचायतराज के शिक्षक विशेष रणनीति में जुटे हैं।
उनका कहना है कि मुख्यमंत्री जब तक पूर्व डीए और चयनित वेतनमान भुगतान को लेकर किए गए वायदे को मार्च से पहले पूरा करने का लिखित आश्वासन नहीं देगी, विरोध जारी रखा जाएगा। सूत्रों का कहना है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर शिक्षकों की ओर से सीएम को काले झंडे दिखाने की भीतैयारी की जा रही है।
विरोध की शुरुआत २१ जनवरी से झुंझुनूं जिले के नवलगढ़ ब्लाक से होगी। शिक्षक संघ (शेखावत) की ओर से इस मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरना दिया जाएगा। इधर, सीकर जिला इकाई को भी प्रदेश स्तर पर होने वाली प्रांतीय बैठक में दिए जाने वाले निर्देशों का इंतजार है।
पैसा दो नहीं तो भुगतो परिणाम
जानकारों का कहना है कि शिक्षकों द्वारा कांग्रेस सरकार की खिलाफत की मुख्य वजह डीए और चयनित वेतनमान के भुगतान को लेकर थी। इसका लाभ उठाकर भाजपा ने सत्ता में आते ही इस मांग को पूरा करने का वायदा किया था। अब चार साल बाद भी मांग पूरी नहीं होने पर शिक्षकों ने चुनावी परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है।
कहां कितना बकाया
अकेले सीकर जिले में जहां पंचायतराज के 2890 शिक्षकों का करीब एक करोड़ 24 लाख रुपए बकाया चल रहे है, वहीं झुंझुनूं और चूरू जिले में यह राशि करीब आठ लाख रुपए है।
जानकारी के अनुसार सीकर जिले के दांतारामगढ़ ब्लाक में डीए और चयनित वेतनमान के 25 लाख रुपए, खंडेला में 14 लाख रुपए, श्रीमाधोपुर में 20 लाख रुपए, नीमकाथाना में 40 लाख रुपए, लक्ष्मणगढ़ में 25 लाख रुपए बकाया चल रहे हैं। इधर, झुंझुनूं जिले के नवलगढ़ में एक करोड़ और चिड़ावा में 70 लाख रुपए की राशि दस सालों से बकाया है।
यहां वेतन का संकट
धोद और फतेहपुर ब्लाक में शिक्षकों का डीए भुगतान कर दिया गया है। लेकिन अभी तक ब्लाक में कार्यरत शिक्षकों को दिसंबर का वेतन नहीं मिल पाया है। जानकारों का कहना है कि ये संकट शिक्षकों के वेतन बजट से डीए और बोनस का भुगतान करने के कारण हुआ है। इधर, पिपराली ब्लाक में डीए सहित अन्य भुगतान सर्व शिक्षा अभियान के खाते से करने की जानकारी मिली है।
इसका भी है विरोध
शिक्षकों में सरकार के खिलाफ नौ, अठारह तथा 27 साल की सेवा के बाद मिलने वाले चयनित वेतनमान के संबंध में पैदा हुई विसंगति को लेकर भी गहरा रोष व्याप्त है। शिक्षक नेता गुरुदेव गोदारा ने बताया कि सरकार की ओर से दस और बीस साल पर मिलने वाले वेतनमान के कारण प्रत्येक शिक्षक को सालाना आठ से दस हजार रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
>> मामला प्रोसेस में है। जल्द ही शिक्षकों का बकाया भुगतान कराया जाएगा। इस बारे में शिक्षाविभाग के जरिए सरकार को फाइल पहले ही भिजवा दी गई थी।
जे.पी. चंदेलिया शिक्षा आयुक्त बीकानेर
>> सरकार इस मामले में गंभीर नहीं है। हमने मुख्यमंत्री और पूर्व शिक्षा मंत्री तिवाड़ी से कई बार इस बारे में निवेदन किया था। शीघ्र समाधान नहीं होने पर हम दबाव बनाएंगे।
महावीर सिहाग प्रदेश महामंत्री, राजस्थान शिक्षक संघ शेखावत