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मेधा पाटकर ने साधा सरकार पर निशाना

रायपुर. सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह डा. सेन के साथ जेल में ज्यादती कर मानवाधिकार का हनन कर रही है। उन्होंने कहा कि सलवा-जुडूम चलाने वाली सरकार को डा. सेन की जगह जेल में होना चाहिए। सुश्री पाटकर ने आज देशभर के दर्जनभर सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ सेंट्रल जेल में डा. सेन से मुलाकात की। जेल परिसर में उन्होंने पत्रकारों से चर्चा में बताया कि यह उनकी डा. सेन से दूसरी मुलाकात थी।

उनके साथ मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव व प्रदेश के शिक्षा सलाहकार एससी बेहार मैग्सेसे पुरस्कार विजेता संदीप पांडे व अरविंद केजरीवाल, मधु भादुरी, निवेदिता मेनन, उमा चक्रवर्ती, मनोरंजन मोहंती, इंद्रा ग्रोवर, सुषमा आदि भी थे। उन्होंने कहा कि जेल में डा. सेन मानवाधिकारों की चिंता कर रहे हैं। सुश्री पाटकर ने डा. सेन की गिरफ्तारी को संपूर्ण मानवाधिकार पर हमला निरुपित करते हुए कहा कि छग सरकार ने सवला-जुडूम के नाम पर आतंक मचा रखा है।

वह संविधान विरोधी काम कर रही है। भय व डर का माहौल बनाकर सामाजिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ षडयंत्र किया जा रहा है। यह केवल डा. सेन नहीं बल्कि हर सामाजिक कार्यकर्ता का मसला है। डा. सेन केवल छग तक सीमित नहीं थे, ऊन्होंने देशभर के सामाजिक संगठनों के साथ काम किया है। उन पर राजद्रोह व नक्सलवाद का आरोप पूरी तरह बेबुनियाद है। मुलाकात पर संतुष्टि जताते हुए पाटकर ने कहा कि जिन आरोपों में उन्हें गिरफ्तार किया वह बेबुनियाद है।

सेन से झाडू लगवाई जा रही - बेहार

मध्यप्रदेश के पूर्व सीएस श्री बेहार ने कहा कि जेल में बंदियों का इलाज किया जाता है पर डा. सेन का इलाज बंद कर दिया गया है। उनका वजह 15 किलो कम हो गया है। अखबार जैसी सुविधाएं बंद कर केवल एक अखबार दिया जा रहा है वह भी काट-छांट कर। मामला सामने आने पर वे खुद पुलिस के सामने हाजिर हुए थे। तब डाक्टरों ने उन्हें अस्पताल में भर्ती की सलाह दी गई थी। नियमों के अनुसार वे संबंधित व्यक्ति से उसकी विशेषज्ञता के अनुसार काम लिया जाना चाहिए। वे डाक्टर हैं तो उनसे डाक्टरी काम लिया जाना चाहिए पर जेल में उनसे झाड़ू लगवाई जा रही है।

पांडे ने किया सयात्ग्रह का ऐलान

मैग्सेसे पुरस्कार विजेता और सामाजिक कार्यकर्ता संदीप पांडे ने डा. सेन की रिहाई के लिए सत्याग्रह करने की घोषणा की उन्होंने कहा कि डा. सेन के स्वास्थ्य को देखते हुए उनकी रिहाई जल्दी होनी चाहिए। उन्होंने इसके लिए मानवाधिकार संगठनों और कार्यकर्ताओं के समाने उपवास का प्रस्ताव रखा है। इसके लिए बैठक भी बुलाई गई है। इसकी तिथि तय की जा रही है।

इसके बाद वे रायपुर आकर 10 दिनों का उपवास करेंगे। उन्होंने कहा कि डा. सेन कभी हिंसा से जुड़े नहीं रहे। हम उन पर लगाए आरोपों का समाधान चाहते हैं। सभी चाहते हैं कि डा. सेन की रिहाई के लिए कानूनी और राजनीतिक लड़ाई तेज की जाए। उन्हें रिहा कराने सामाजिक कार्यकर्ताओं का दल राज्यपाल व मुख्यमंत्री से भी मिलेगा।

दंतेवाड़ा का जायजा लेकर दल लौटा

नक्सलवाद प्रभावित जिले दंतेवाड़ा का जायजा लेकर सामाजिक कार्यकर्ताओं का दल लौटा। इसमें प्रो. गोपाल अय्यर, वृंदा ग्रोवर, अरविंद केजरीवाल, मनीष श्रीनोधिया, स्वाति मालीवाल, संतोष, प्रो. ओमप्रकाश, अमित भादुरी, मनोरंजन मोहंती, रवि हिमाद्री, टीपी जान आदि शामिल थे। प्रो. अय्यर ने कहा कि उद्योगों के गरीबों की जमीन हड़पकर सरकार हिंसा को बढ़ावा दे रही है।

आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन के अधिकारों का हनन करने से हिंसा की प्रवृति बढ़ेगी। यह मानधिकार का भी हनन है। रायगढ़ में यही हो रहा है। हम वहां भी जाएंगे। सुश्री पाटकर ने बस्तर की तुलना नंदीग्राम से करने से इनकार करते हुए कहा कि दोनों ही तुलना नहीं की जा सकती। हम जहां जो जिम्मेदार हैं उन्हें जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

गुजरात के तहलका उजागर होने के बाद गुजरात के हत्याकांड में कई और राजनेता जेल जाएंगे। चाहे वे चुनाव जीत गए हों पर कानून से बच नहीं सकते। बिल्किस बानों प्रकरण मानवाधिकार की बड़ी जीत है। यदि यह मामला गुजरात के बाहर नहीं चलाया जाता तो शायद न्याय नहीं ंमिलता। डा. सेन का केस भी छग के बाहर चलाए जाने की जरूरत महसूस की जा रही है। बातचीत के दौरान पीयूसीएल के राजेंद्र सायल भी मौजूद थे।





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