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Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर. मकान में गड़ा धन निकालने का लालच देकर एक फर्जी बाबा ने कोरबा के मोतीलाल को ठगी का शिकार बनाया। बाबा ने उसे एक महीने तक उलझाए रखा। इस दौरान मोतीलाल से तीन किस्तों में करीब 51 हजार रुपए ऐंठ लिए। सेरीखेड़ी, मंदिरहसौद के बाबा राजमल नेताम ने मोतीलाल से एक लाख 30 हजार रुपए की मांग की थी।
अफसरों ने बताया कि मुख्य आरोपी के अलावा नेवरा के दारासिंह, खोरू और रंजीत नेताम भी इस चारसौबीसी में लिप्त थे। पुलिस ने बताया कि नेताम बाबा का चेला दारासिंह 28 दिसंबर को मोतीलाल के गांव उरगा में आयुर्वेदिक दवाई बेचते हुए उसके घर पहुंचा। उसने घर में ऐसा माहौल बनाया जैसे वहां काफी धन गड़ा हो। मोतीलाल लालच में आ गया। तब उसने आश्वासन दिया कि अपने गुरु के जरिए वह इसे निकलवा देगा।
उसने मोतीलाल को 10 हजार रुपए लेकर 5 जनवरी को रायपुर के कलेक्टोरेट गार्डन में बुलाया। अपने करीबी रिश्तेदार के साथ यहां पहुंचे मोतीलाल को बाबा ने गार्डन में ही जमीन खोदकर जेवर और चांदी के सिक्के निकालकर दिखाए। इससे दोनों हैरान रह गए। इसके बाद बाबा और चमचों ने वसूली शुरू की। मोतीलाल को 15 जनवरी को गायत्री हास्पिटल के पास बुलाकर 25 हजार रुपए वसूले। मोतीलाल ने गड़े धन की चाह में रिश्तेदारों और दोस्तों से उधार लेकर बाबा को पैसे दिए, लेकिन बाबा कभी उसके घर नहीं गया।
प्लानिंग बनाकर घेरा
मोतीलाल सोने-चांदी का मामूली कारीगर है। काफी वसूली के बाद भी गड़ा धन बाबा ने नहीं निकाला, तब परिजनों को शक हुआ। उन्होंने बाबा के भंडाफोड़ का प्लान बनाया। योजना के मुताबिक उन्होंने 20 जनवरी को एक और किस्त देने के लिए कथित बाबा और उसके तीनों साथियों को कलेक्टोरेट गार्डन में बुलाया। गोलबाजार पुलिस को इसकी खबर थी। चारों जैसे ही पहुंचे, पुलिस ने उन्हें दबोच लिया। आरोपियों के खिलाफ धारा 420, 34 के तहत जुर्म दर्ज किया गया।
और भी शिकायतें
इस गिरोह के खिलाफ पुलिस को शिकायतें मिल रही हैं। अछोली के कोटवारी की पत्नी ने गोलबाजार थाने में लिखित आवेदन प्रस्तुत किया है कि झाड़-फूंक के नाम पर उससे 7000 रुपए वसूल लिए। उन्हें कथित बाबा दो-तीन महीने से झांसा देकर ठगी करता रहा।
पहले भी हुई वारदात
प्रदेश में जमीन में गड़े धन का भ्रम फैलाकर धोखाधड़ी करने वाले कई गिरोह सक्रिय हैं। पहले भी ऐसे गिरोहों को दबोचा जा चुका है। पिछले साल फरवरी में सुंदरनगर का एक कथित बाबा इसी तरह की ठगी करते हुए पकड़ा गया था।
इसलिए रिपोर्ट नहीं
पुलिस अफसरों का कहना है कि कई बार ठगे जाने के बावजूद लोग इसलिए रिपोर्ट नहीं कराते, क्योंकि गड़ा धन शासन की संपत्ति होती है। इसमें शिकायत करनेवाले के ही फंसने का अंदेशा रहता है।