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Madhya Pradesh
Gwalior Gwalior ग्वालियर. शहर की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि रज्जाूमार्ग (रोपवे) का भविष्य मंगलवार को तय होना है। फूलबाग से किला पर जाने वाले रोपवे के लिए एएसआई की यदि अनुमति मिल जाती है तो नगर निगम की एक महत्वाकांक्षी योजना पूरी हो जाएगी।
हालांकि इस मामले में आर्केलॉजीकल सर्वे आफ इंडिया (एएसआई) के भोपाल मंडल के अधीक्षण केके मोहम्मद नगर निगम को एनओसी दिए जाने के लिए अपनी टीप के साथ रिपोर्ट दिल्ली स्थित मुख्यालय को भेज चुके हैं।
श्री मोहम्मद ने नगर निगम को एनओसी जारी करने से पहले कुछ शर्ते रखी हैं। इन शर्तो के बारे में महापौर विवेक शेजवलकर ने कहा कि एएसआई की शर्तो से रोपवे के स्टेशन का सौंदर्य ही बढ़ेगा। शर्तो में कहा गया है कि रोपवे के टर्मिनल का रंग किले के पत्थरों जैसा होना चाहिए। इसी तरह की दो शर्ते और भी हैं।
श्री मोहम्मद ने भी ग्वालियर में रोपवे बनाए जाने की सिफारिश करते हुए अपनी रिपोर्ट में कहा कि इससे किले पर आने वाले पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी और एएसआई को आर्थिक लाभ होगा।
इसके बाद नगर निगम की ओर से एएसआई की डायरेक्टर जनरल अंशु वैश्य के सामने रोपवे का प्रजेन्टेशन किया जा चुका है और उन्होंने सैद्धांतिक स्वीकृति भी जारी कर दी है। अब मंगलवार को मौका मुआयना कर एएसआई के दल को अपनी रिपोर्ट देना है। यदि दल के सदस्य रिपोर्ट रोपवे के पक्ष में देते हैं तो ग्वालियर में रोपवे की स्थापना का रास्ता साफ हो जाएगा।
कई बार किया गया स्थान का चयन
किले पर बनने वाले रोपवे के टर्मिनल पर सिंधिया स्कूल की आपत्ति के बाद नगर निगम और राजस्व विभाग का संयुक्त दल पांच माह पूर्व किले के उन स्थानों का सर्वे कर चुका है जिन्हें सिंधिया स्कूल द्वारा सुझाया गया था।
इनमें एक स्थान सिंधिया स्कूल के कर्मचारी आवास के पास था और दूसरा दूरदर्शन टावर के समीप, उक्त दोनों स्थानों पर रोपवे के एलाइनमेंट को लेकर आने वाली परेशानी के चलते सर्वे टीम ने उन्हें खारिज कर दिया। रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान प्रस्ताव के अतिरिक्त किसी अन्य स्थान पर रोपवे का अपर टर्मिनल बनाया जाना नामुमकिन है।
स्वीकृति के बाद डेढ़ वर्ष लगेगा रोपवे बनाने में
बिल्ट आपरेट एंड ट्रांसफर (बीओटी) स्कीम पर रोपवे बनाने वाली कम्पनी दामोदर रोपवे की सहायक कम्पनी श्री बालाजी रियल एसटेट ग्रुप को रोपवे का निर्माण करना है। इस कम्पनी के प्रस्ताव के अनुसार एएसआई की एनओसी मिलने के बाद रोपवे के निर्माण में डेढ़ वर्ष का समय लगेगा। इस पर लगभग सात करोड़ रुपए खर्च होने की संभावना है।
निगम ने यह रखी हैं शर्ते
नगर निगम और रोपवे कम्पनी के बीच हुए करार के अनुसार रोपवे के संचालन का अधिकार कम्पनी को 30 वर्षो के लिए दिया गया है। उक्त अवधि के बाद उक्त संपत्ति नगर निगम की होगी। संचालन के दौरान कम्पनी ही मेंटीनेंस करेगी। अनुबंध के अनुसार कम्पनी नगर निगम को 12 लाख रुपए प्रतिवर्ष देगी। यदि साल भर में तीन लाख से अधिक टिकटों की बिक्री कम्पनी द्वारा की जाती है तो टिकटों से मिली राशि का पांच प्रतिशत हिस्सा निगम को दिया जाएगा।
छह ट्रालियां चलेंगी
रोपवे में 6 ट्रालियां चलाई जाएंगी। एक ट्राली में आठ लोगों के बैठने की क्षमता होगी। आठ घंटे रोज होगा ट्राली का संचालन। जिसमें एक हजार पर्यटक सफर कर सकेंगे। रोपवे से किले पर जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति से चालीस रुपए टिकट लिया जाएगा। टिकट की राशि नगर निगम द्वारा तय की गई है। समय के साथ टिकट की राशि में बढ़ोतरी भी होगी।