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Madhya Pradesh
Gwalior Gwalior ग्वालियर.
निकोलस पीरामल कंपनी के पीथमपुर प्लांट के प्रेसीडेंट अश्विनी भट्ट के अपहरण के मामले में पुलिस अब मानने लगी है कि इसमें बड़े इंटरस्टेट गैंग का हाथ है। इस गैंग का नेटवर्क मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में है। इस बीच स्टेट एसटीएफ ने भी ग्वालियर, धौलपुर और इंदौर में अपहरण के सूत्र तलाशने शुरू कर दिए हैं।
उल्लेखनीय है कि एक्सपोर्टेक-2008 में भाग लेने आए दवा कंपनी निकोलस पीरामिल के पीथमपुर प्लांट के प्रेसीडेंट अश्विनी भट्ट शुक्रवार की दोपहर ग्वालियर से इंदौर अपनी कार में रवाना हुए थे। वे इंदौर नहीं पहुंचे और इनकी कार धौलपुर के निहालगंज थानाक्षेत्र में खड़ी मिल गई। पहले तो पुलिस इन्हें लापता मानकर चल रही थी लेकिन कार मिलने के बाद पुलिस ने इसे अपहरण मान लिया।
सोमवार को ग्वालियर पुलिस ने शहर के शातिर लुटेरे और इंटरस्टेट गिरोहों से संपर्क रखने वाले बदमाशों को टटोला, अफसरों का कहना है कि पुलिस को इनसे कोई खास सूचना नहीं मिली है लेकिन सूत्र बताते हैं कि दो इंटरस्टेट बदमाशों के बारे में पुलिस को जानकारी मिली है जिनका संपर्क इंदौर से रहा है और ग्वालियर-चंबल में भी इन्होंने अपना नेटवर्क तेैयार किया है।
इस बीच स्टेट एसटीएफ ने भी अपनी कार्रवाई शुरू कर दी। घटना की प्रारंभिक जानकारी उन्होंने जिला पुलिस से ली और इसके बाद अपहृत अश्विनी भट्ट की जानकारी जुटाने के लिए अपने मुखबिर सेट कर दिए।
अपहरण के पुराने मामलों को खंगाला
पुलिस ने अपने मुखबिरों को अपहृत का पता लगाने के लिए सेट करने के साथ-साथ अपहरण के पुराने हाई-प्रोफाइल मामलों को भी खंगाला। चार साल पहले हुए जयपुर के व्यापारी सुमेधा अपहरणकाण्ड के बारे में पुलिस अफसरों ने पुरानी जानकारियां टटोलीं। अपहरण के इस मामले में पुलिस ने मुरैना के बिच्छू नामक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था।
सोमवार को पुलिस यह भी जानकारी एकत्रित करती कि रही वह इन दिनों कहां है और क्या कर रहा है ? इसके अलावा तीन साल पहले हुए मालनपुर स्थित मल्टी नेशनल कंपनी के मैनेजर कीथ मेंडिस अपहरण कांड से जुड़े लोगों से भी के बारे में भी जानकारियां जुटाई र्गइ। पुलिस बदमाशों के फोन कॉल का इंतजार भी कर रही है। पुलिस का कहना है कि एक बार फोन कॉल आने के बाद इस मामले में महत्वपूर्ण दिशा मिल सकती है।
पुलिस प्रेशर में, उच्चस्तर पर मॉनीटरिंग
अश्विनी भट्ट के मामले को प्रदेश सरकार ने अति संवेदनशील माना है। ग्वालियर पुलिस के काम की भी पल-पल मॉनीटरिंग गृह मंत्रालय स्तर पर की जा रही है।