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राजपूतों की वार्ता विफल

जयपुर. ओबीसी में आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलित राजपूत समाज की मुख्यमंत्री से वार्ता विफल हो गई। समाज के नेता लोकेंद्र सिंह कालवी की अगुवाई में सोमवार शाम छह बजे केवल तीन मिनट तक हुई वार्ता के दौरान मुख्यमंत्री ने पांच साल पहले बतौर सांसद राजपूत समाज को आरक्षण के लिए लिखी गई चिट्ठी को अधूरी बताया।

वार्ता विफल होने के बाद सचिवालय से बाहर आकर कालवी ने पत्रकारों से कहा कि मुख्यमंत्री ने राजपूतों को झांसा दिया है। अब समाज चैन से नहीं बैठेगा। जल्द ही आंदोलन की अगली रणनीति बनाई जाएगी। वार्ता के लिए नहीं बुलाने पर राजपूत समाज के लोगों ने करीब ढाई घंटे तक सिविल लाइंस फाटक पर रास्ता जाम किया व जमकर नारेबाजी की।

मुख्यमंत्री आवास में घुसने के प्रयास में पुलिस ने दस लोगों को पकड़कर बाद में छोड़ दिया। रविवार रात भवानी निकेतन परिसर में महापड़ाव पर बैठे राजपूत समाज के लोगों को अधिकारियों ने यह कहकर उठवा दिया था कि सोमवार को सुबह करीब 11 बजे मुख्यमंत्री उनसे बात करेंगी।

बुलावे का इंतजार: कालवी हनुमान नगर स्थित आवास पर सुबह से ही मुख्यमंत्री हाउस से वार्ता के बुलावे का इंतजार कर रहे थे। बाद में कालवी को सूचना दी गई कि मुख्यमंत्री दोपहर में सचिवालय में उनसे वार्ता करेंगी। मुख्यमंत्री से मिलने के लिए 14 लोगों के नाम भी तय हो गए। दोपहर करीब डेढ़ बजे कालवी व अन्य राजपूत नेता वाहनों में सवार होकर अशोक नगर थाने के पीछे पुलिस सदन में आए।

वहीं एक प्रशासनिक अधिकारी की मदद से राजपूत समाज के शिष्टमंडल के सचिवालय पास बनाए गए। करीब दो घंटे के इंतजार के बाद कालवी को सूचना दी गई कि मुख्यमंत्री शाम 7 बजे उनसे मिलेंगी। इस सूचना से राजपूत लोग खफा हो गए और पुलिस सदन से पैदल ही सिविल लाइंस की ओर कूच कर दिया। वहां रेलवे फाटक पर पहले से ही बैरीकेड्स लगे होने के कारण लोग रुक गए और नारेबाजी करने लगे।

तभी स्पेशल टास्क फोर्स को भी बुला लिया गया। करणी सेना के युवकों ने सड़क पर पोल व पत्थर डालकर ट्रैफिक रोक दिया और धरना देने बैठ गए। समाज के नेता एक खुली जीप पर खड़े होकर भाषण देने लगे। ब्राrाण समाज के नेता सुरेश मिश्रा भी फाटक पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि इस लड़ाई में ब्राrाण राजपूतों के साथ हैं। करीब ढाई घंटे तक फाटक पर तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। पुलिस के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। शाम पौने छह बजे कालवी ने आंदोलनकारियों से कहा कि मुख्यमंत्री बात करने के लिए बुला रही हैं। इसके बाद कालवी के साथ समाज के अन्य लोग भी सचिवालय के लिए पैदल कूच कर गए।

सनसनी फैली: रास्ते में वन भवन के पास किसी ने आंदोलनकारी व्यक्ति की गाड़ी का शीशा तोड़ दिया। इससे कुछ देर के लिए अफरा-तफरी सी मच गई। बाद में कालवी ने समाज के अन्य लोगों को एक पार्क में बिठाया और वे अन्य प्रमुख लोगों के साथ गाड़ियों में सवार होकर मुख्यमंत्री से वार्ता के लिए सचिवालय में गए।

मुख्यमंत्री हाउस में घुसने का प्रयास

अन्य रास्तों से पहुंचे राजपूत समाज के दर्जनों महिला-पुरुषों ने मुख्यमंत्री आवास के अंदर घुसने का प्रयास किया। इस पर पुलिस उन्हें पकड़कर ले गई। करीब एक घंटे बाद उन्हें छोड़ दिया गया।

जातिगत आरक्षण के मामले में अब बहुत हो चुका है। आरक्षण की बातें छोड़कर विकास और निवेश के लिए एकजुट होने की जरूरत है। राज्य के लोग जातिगत आरक्षण में ही उलझकर रह गए तो न निवेशक आएंगे और न ही विकास हो सकेगा।
—वसुंधरा राजे, मुख्यमंत्री





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