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अलगाववाद दूर होगा शिक्षा से: सुदर्शन

बिलासपुर. राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सर संघ चालक कुप्प सी. सुदर्शन ने कहा है कि देश में संस्कारयुक्त शिक्षा ही सवरेत्तम है। इसके जरिए विभिन्न प्रांतों में सुलग रही अलगाववाद की आग को बुझा कर राष्ट्रप्रेम की लौ जलाई जा सकती है। श्री सुदर्शन ने सोमवार की सुबह कोनी में सरस्वती ग्राम शिक्षा समिति के प्रांतीय कार्यालय भवन का भूमिपूजन किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि अंग्रेजों ने हमारी आर्थिक, सामाजिक तथा शैक्षणिक व्यवस्था को तहस-नहस कर दिया।

वे जानते थे कि भारतीय शिक्षा पद्धति ही सवरेत्तम है। इसके रहते वे देश को गुलाम नहीं बना सकते, इसलिए उन्होंने हमारी शिक्षा पद्धति को निशाना बनाया। अंग्रेजों के समय शिक्षा पद्धति में हुई क्षति का खमियाजा हम अभी तक भोग रहे हैं। विद्या भारती एवं ग्राम शिशु भारती संस्कारवान बनाने वाली शिक्षा देने की दिशा में अनुकरणीय योगदान कर रहे हैं। श्री सुदर्शन ने कहा कि शिक्षा अपनी मातृभाषा में ही दी जानी चाहिए। ग्राम भारती यह कार्य बेहतर ढंग से कर रही है।

कार्यक्रम में प्रांत संघ चालक विक्रम जी तामस्कर, सरस्वती शिक्षा संस्थान के उपाध्यक्ष देवीप्रसाद देवांगन, राधेश्याम देवांगन, स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल, मेयर अशोक पिंगले, गोपाल तिवारी, कौशल बेहार, भाजपा के प्रदेश महामंत्री धरमलाल कौशिक, मुरारीलाल सिंह सहित अन्य उपस्थित थे।

55 समाज प्रमुखों से सुदर्शन की बैठक आज: सर संघ चालक श्री सुदर्शन मंगलवार को सरस्वती शिशु मंदिर कोनी में विभिन्न समाजों के 55 प्रमुख नेता और पदाधिकारियों से चर्चा करेंगे। संघ के एजेंडे में इसे सामाजिक समरसता का नाम दिया गया है। माना जाता है कि श्री सुदर्शन समाज प्रमुखों के जरिए आरएसएस के राष्ट्र-निर्माण के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाने के लिए अपने विचार रखेंगे।





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