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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur बिलासपुर. हाईकोर्ट ने बिलासपुर-रायपुर फोर लेन बनाने के लिए केंद्र और राज्य शासन द्वारा किए जा रहे प्रयासों के संबंध में रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। भारत सरकार व राज्य शासन के वकीलों ने इसके लिए दो सप्ताह का समय मांगा है। मामले की अगली सुनवाई फरवरी के पहले हफ्ते में होने की संभावना है। बारिश में नांदघाट पुल डूबने से लोगों को होने वाली परेशानी को हाईकोर्ट ने गंभीरता से लेते हुए इस संबंध में छपी खबरों को स्व-प्रेरित होकर जनहित याचिका मानकर कोर्ट ने सुनवाई शुरू की है।
शिवनाथ नदी पर नांदघाट के पास पुल का काम पूरा न होने से लोगों को हो रही परेशानी को हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है। अगस्त 2005 में अखबारों में खबरें प्रकाशित हुई थीं, जिसमें शिवनाथ नदी में बाढ़ की वजह से नांदघाट पुल के बंद होने से ट्रैफिक जाम और उसमें फंसे लोगों की बदहाली का ब्योरा था। यहां बने अंग्रेजों के जमाने के पुराने पुल की ऊंचाई कम होने से वह बाढ़ में डूब जाता है।
वहीं नए पुल की हालत खराब होने से उससे भी भारी वाहनों का आवागमन नहीं हो पाता। अखबारों में प्रकाशित पिछले कई सालों से लोगों को हो रही इस समस्या को हाईकोर्ट ने जनहित का मुद्दा मानकर पत्र याचिका के तौर पर स्वीकार सुनवाई शुरू की है। वर्ष 2005 में ही कोर्ट ने भारत सरकार और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर इस बाबत जवाब मांगा। छत्तीसगढ़ शासन की ओर से प्रस्तुत किए गए जवाब में बताया गया कि नांदघाट के नए पुल के पास ही दूसरे पुल का निर्माण चल रहा है।
लेकिन केंद्र शासन की ओर से अब तक जवाब नहीं दिया गया। सुनवाई के दौरान ही नेशनल हाईवे लोक निर्माण संभाग के अफसरों ने हाईकोर्ट के एक सवाल के बताया कि ट्रैफिक का दवाब कम होने से केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्रालय ने सिमगा-नांदघाट के बीच फोर लेन की जगह टू-लेन रोड ही रखने का निर्णय लिया है। इस पर कोर्ट ने कहा कि नए हाईकोर्ट भवन के बोदरी में स्थानांतरित होने के बाद रायपुर रोड पर ट्रैफिक का दबाव बढ़ेगा।
ऐसे में बिलासपुर-रायपुर रोड पर टू-लेन की जगह फोरलेन सड़क की जरूरत है। इस मामले की तत्कालीन कार्यवाहक चीफ जस्टिस जगदीश भल्ला और जस्टिस टीपी शर्मा की डिवीजन बेंच में पिछले हफ्ते सुनवाई हुई। इस दौरान मामले में नियुक्त अमीकस क्यूरी (न्यायमित्र) एमपीएस भाटिया ने कोर्ट का ध्यान आकर्षित किया कि इस स्थिति में शिवनाथ नदी पर नांदघाट में बनाए जा रहे नए पुल को भी फोरलेन ट्रैफिक के हिसाब से बनवाना चाहिए।
इस पर कोर्ट ने केंद्र व राज्य सरकार के वकीलों से जानना चाहा कि बिलासपुर-रायपुर रोड को फोरलेन बनाने के लिए क्या किया जा रहा है। अगर कोई प्रस्ताव लंबित है, तो सरकारें उस पर क्या कर रही हैं। इस पर केंद्र शासन के वकील भीष्म किंगर और राज्य शासन के वकील आशुतोष सिंह कछवाहा ने जवाब देने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा। कोर्ट ने इस संबंध में केंद्र व राज्य सरकार से विस्तृत जानकारी लेकर दो सप्ताह में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।