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अजमेर.
राज्यस्तरीय गणतंत्र दिवस समारोह से पांच दिन पहले सोमवार तक शहर के सौंदर्यन के काम ‘आधा सपना’ सच होने जैसे साबित हो रहे थे, बाकी का आधा सपना तय समय सीमा में हकीकत में बदलने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। कामों का मनमाफिक विस्तार और लेटलतीफी की वजह से शहर की सुंदरता में अपेक्षित निखार नहीं आ पाया है। अधूरे काम दिक्कत का सबब बन गए हैं। दो दिन में काम पूरा करने के फरमान के बाद रफ्तार तो बढ़ी, लेकिन गुणवत्ता को दरकिनार कर दिया गया।
बजरंगगढ़ चौराहा
शहर के मुख्य सर्किल पर गौमुख छतरी लगा कर पौंड बनाने और जेएलएन व सुभाष उद्यान की दीवारें तोड़कर सड़कों को चौड़ा किया जाना था। इसके बाद इसमें एनसीसी दफ्तर तक सड़क चौड़ा कर चट्टान के सहारे दीवार बनाने का काम शामिल कर दिया गया। नतीजतन न तो यह सड़क चौड़ी हो पा रही है और न ही दीवार। डिवाइडर का काम भी अधूरा रह जाएगा। माता मंदिर को केसर बाग पुलिस चौकी परिसर में शिफ्ट करने की कवायद शुरू हुई लेकिन भूमि विवाद होने से आनन-फानन में दीवार तोड़ दी गई।
पटेल मैदान
यहां मैदान की मरम्मत व सुविधाएं जुटाने का काम होना था। मगर, मैदान के बाहर की सड़कों को चौड़ा करने का काम इसमें अलग से जोड़ दिया गया। सड़कों को चौड़ा करने के लिए बिजली को खंबों को शिफ्ट किया जाना था लेकिन समय की कमी के कारण अब इन्हें किए बगैर सड़कें बन रही हैं। बाद में बिजली की केबिल डालने के लिए सड़कों की टाइल्स को फिर खोदना पड़ेगा। अजमेर क्लब से नेहरू अस्पताल तक सड़क को चौड़ा करने की कार्रवाई की गई है लेकिन पेड़ों की कटाई नहीं होने से काम फिर भी अधूरा रहेगा।
सुभाष उद्यान
जलदाय विभाग के पंपिंग स्टेशन से प्राइवेट बस स्टेंड तक दीवार हटा कर रेलिंग लगा दी गई। दीवार व रैलिंग के बीच की जगह का उपयोग सड़क की चौड़ाई बढ़ाने के लिए नहीं हो सकेगा, क्योंकि पुराने पेड़ों को नहीं हटाया गया। सड़क की चौड़ाई बढ़ाने के लिए नसियां की दीवार के पास से गुजर रहे नाले की चौड़ाई कम करने का काम शुरू कर किया गया जो समारोह से पहले पूरा होना मुश्किल है। नाले को पाट भी दिया जाता है तो बिजली के खंबे नहीं हटने से सड़क चौड़ी नहीं हो सकेगी।
सेंट्रलाइज किचन
मिड डे मील तैयार करने के लिए तोपदड़ा में बनायी जा रही सेंट्रलाइज किचन का ढांचा खड़ा कर दिया गया है। उद्घाटन से पहले उसके ऊपर एससी शीट लगनी मुश्किल है। अब तक शीट लगाने के लिए लोहे की कैंची लगाने का काम नहीं हो सका है। नंदी फाउंडेशन द्वारा पोषाहार बनाने के लिए मशीनें भी उपलब्ध नहीं करायी गई हैं।
मुख्य सड़कें
माकड़वाली रोड, रिंग रोड, चार अन्य गौरव पथ और सुभाष नगर चुंगी से खेल मैदान तक की सड़कें चौड़ा करने के काम प्रस्तावित थे। खेल मैदान तक सड़क को चौड़ा करने के लिए अतिक्रमण ध्वस्त करने के साथ दोनों किनारों की खुदाई कर दी गई। जब मुख्यमंत्री के वहां जाने का कार्यक्रम रद्द् हुआ तो प्रशासन ने काम बंद कर दिया। सड़क के दोनों खुदे गड्डे दुर्घटना को न्योता दे रहे हैं। रिंग रोड चौड़ा करने का काम शुरू हुआ है लेकिन समारोह से पहले इसका पूरा होना संभव नहीं है।
गौरव पथ
योजना के तहत आना सागर सरक्यूलर रोड को चौड़ा करने के बाद बिना डिवाइडर बनाए डामरीकरण शुरू कर दिया गया है। बिजली के पोल भी लगाने बाकी हैं। यह काम अधूरा तो रहा ही है बाद में इसे खोदकर डिवाइडर लगाने पड़ेंगे। फिर लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
डिवाइडर
शहर की मुख्य सड़कों के बीच डिवाइडर बनाने के साथ उन पर रंगीन स्लैब और पेड़ लगाने का फैसला भी जल्दबाजी में लिया गया। सीसीबी से सूचना केन्द्र चौराहे तक डिवाइडर बनाने का काम पूरा नहीं होने से सड़क का डामरीकरण भी अटक गया। डिवाइडर के बीच पौधारोपण भी शुरू किया गया। इन पेड़ों को समारोह के बाद एक बार उखाड़ कर लगाया जाएगा। जीसीए से जौंसगंज चौराहे तक डिवाइडर पर रंगीन स्लैब लगाने की कार्रवाई भी जल्दबाजी में शुरू कर दी गई। इनमें भी गुणवत्ता की कोई गारंटी नहीं है।
मुख्य मार्र्गो के सभी काम पूरे हो गए हैं। डिवाइडर के कार्य 26 के बाद तक प्रस्तावित हैं, जिन्हें पूरा कर लया जाएगा।
-आरपी तिवारी, एक्सइएन, पीडब्ल्यूडी
विडंबना
काम की रफ्तार तो बढ़ी, गुणवत्ता दरकिनार। सुविधा की बजाय परेशानी का सबब बने अधूरे काम।