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एनजीओ ‘ड्रॉप इन सेंटर ’ की प्रेजिडेंट पूजा ठाकुर को एचआईवी पॉजीटिव होने का कोई पछतावा नहीं है। एड्स के खिलाफ लड़ने की हिम्मत पूजा को अपने बच्चों को देखकर आई। पिछले तीन साल से वह एड्स काउंसलर के तौर पर कार्य करके आम लोगों की तरह खुशहाल जिंदगी जी रही हैं।
पूजा उन लोगों के लिए आदर्श हैं जो एड्स से पीड़ित होने के कारण शर्म महसूस करते हैं। पूजा ने बताया कि वह ‘एड्स पर अभियान’नामक पुस्तिका जल्द ही लॉन्च करने वाली हैं।
ठान लिया न होने दूंगी दोबारा
पूजा को 2005 में पता चला कि उसके पति को एड्स है और वह खुद भी एचआईवी पॉजीटिव हो चुकी हैं। तीन महीने तक प्रॉपर ट्रीटमेंट न मिलने के कारण पूजा ने पति को खो दिया। खुद केअसहाय हो जाने पर उसे गुस्सा भी बहुत आया, लेकिन मन में ठानलिया कि ऐसा किसी और के साथ नहीं होने दूंगी।
दूसरे लोग होते हैं प्रभावित पूजा ने बताया कि जब से वह ‘ड्रॉप इन सेंटर’की प्रेजिडेंट हैं तब से उन्हें देखकर कई लोगों ने एचआईवी होने की बात को स्वीकारा है। उन्होंने बताया कि शुरुआत में एड्स पीड़ित लोग इस बीमारी के बारे में जानकर जिंदगी से निराश हो जाते थे। इस सेंटर की वजह से सीधे आकर इंट्रेक्ट करते हैं और उन्हें जीने की नई राह दिखाई जाती है।
परिवार ने छोड़ा साथ परिवार को जब एचआईवी पॉजीटिव होने की जानकारी मिली तो उन्होंने भी पल्ला झाड़ लिया। दोनों बच्चों के भविष्य की खातिर खुद को स्ट्रॉन्ग बनाया। यही कारण है कि एचआईवी पॉजीटिव होने की जंग अकेले लड़ी और आगे भी लड़ती रहूंगी।
शुरुआत में मिली निराशा
पूजा ने बताया कि जब आसपास के लोगों को इस बीमारी के बारे में पता चला तो उनका नजरिया ही बदल गया। उस समय लोगों की बातों का सामना भी पूजा ने अकेले ही किया। कई लोग तो बुरा-भला भी कह जाते थे।
क्या हैं योजनाएं इस एनजीओ के जरिए पूजा एड्स पेशेंट्स के साथ हो रहे भेदभाव को खत्म करना चाहती हैं। अपने सेंटर के जरिए वह कई पेशेंट्स की जिंदगी सुधार चुकी हैं। पटियाला के दिलबाग सिंह को एड्स होने पर फैक्ट्री से निकाल दिया था। एनजीओ ने केस करके उसकी नौकरी वापस दिलवाई। नाभा के नेकी खान को फैक्ट्री वालों ने एड्स पीड़ित जानकर निकाल दिया तो पूजा ने केस करके नेकी को उनका हक दिलवाया। पूजा एचआईवी पॉजीटिव विधवाओं को सरकार की तरफ से स्पेशल इंसेंटिव दिलवाना चाहती हैं।