|
कोटा.
केस-1
तीन पुलिसकर्मियों ने 23 दिसंबर, 07 को शराब पीकर नयापुरा थाने व अस्पताल में हंगामा मचाया। खुद को मंत्री का रिश्तेदार बताते हुए डीएसपी से अभद्रता की।
केस-2
पुलिसलाइन के तीन पुलिसकर्मियों ने 12 दिसंबर, 07 शराब के कारण आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे कैदी को इलाज के बहाने फरार करवा दिया।
केस- 3
24 मई, 07 को मदहोश हैडकांस्टेबल ने दो घंटे तक शहर के बीच एयरोड्राम सर्किल पर उत्पात मचाया। बाद में पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया।
अपने ही विभाग का भरोसा खो चुके आदतन शराबखोर पुलिसकर्मियों से हथियार ले लिए गए हैं। किसी अनहोनी को टालने के लिए ऐसे पुलिसकर्मियों को भविष्य में कभी भी हथियार न देने के आदेश दिए गए हैं।
तनाव में अपने ही अधिकारी पर गोली चलाने की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए पुलिस अधिकारियों ने यह कदम उठाया है। कोटा पुलिस ने एक माह पूर्व ऐसे 26 पुलिसकर्मियों को आदतन पियक्कड़ घोषित करते हुए ये आदेश दिए।
इन पियक्कड़ों के शराब पीकर सरेआम उत्पात मचाने, शराब के लालच में कैदियों से मिलीभगत की घटनाओं और इन पुलिसकर्मियों के परिजनों से मिली शिकायत के बाद महकमे ने उन्हें सुधारने के लिए ये कदम उठाए हैं।
ऐसा नहीं कि इन्हें सुधरने का मौका दिए बिना यह निर्णय किया गया, बल्कि एक साल से पुलिस प्रशासन इस दिशा में काम कर रहा था। पुलिसलाइन में नशामुक्ति शिविर लगाए गए। इस कदम से कई पुलिसकर्मियों में सुधार आया और उन्होंने शराब छोड़ दी अथवा पीनी कम कर दी।
आखिर में एक एएसआई व 25 हेडकांस्टेबल-कांस्टेबल ऐसे निकले जिन पर इन शिविरों का कोई असर नहीं हुआ। शराबखोरी की उनकी आदत दिन पर दिन बढ़ती ही गई। आखिर इन पियक्कड़ों की सूची तैयार की गई।
उच्च अधिकारियों ने नामजद व आदतन शराबी घोषित इन पुलिसकर्मियों को एकबार फिर प्यार-मनुहार, डांट-फटकार से समझाने की कोशिश की। सारे प्रयास विफल होने के बाद अधिकारियों ने आखिरी रास्ता यही निकाला कि विभाग इन पुलिसकर्मियों पर भरोसा नहीं करे। यही नहीं, उन्हें हथियार देने की गलती भी न की जाए, क्योंकि वे नशे में किसी पर भी कभी भी गोली चला सकते हैं।
न हार्ड ड्यूटी, न परेड
हथियार रखवाने के साथ-साथ अफसरों ने इन पुलिसकर्मियों से हार्ड ड्यूटी व परेड कराना भी बंद कर दिया है। अब ऐसे पुलिसकर्मियों को कभी-कभी वाहन चैकिंग, नाकाबंदी जैसे स्पेशल टास्क में लगाया जा रहा है।
लाइन में अंसतोष
शराबखोर पुलिसकर्मियों से हार्डकोर ड्यूटी व परेड नहीं कराने को लेकर लाइन में अंसतोष है। जो पुलिसकर्मी नशा नहीं करते और अनुशासन में रहते हैं, वे इस व्यवस्था से नाराज हैं। उनका कहना है कि वे अनुशासन तोड़कर भी आराम कर रहे हैं, जबकि हमें नियमों में रहने के बाद भी अधिक काम करना पड़ रहा है।
ये तो बक्से को करता है सेल्यूट!
सूची में शामिल एक एएसआई नशे में अपने बक्से को सेल्यूट मारता है और फिर कमरे से निकल पड़ता है। कई बार तो वह दो-तीन दिन तक ड्यूटी पर लौटकर ही नहीं आता। उसकी तलाश करने पर पता चलता है कि वह गांव देवली में जाम छलका रहा है।
आईजी उत्कल रंजन साहू से सवाल-जवाब
कितने जवानों से हथियार छीने?
एक एएसआई व 25 हेडकांस्टेबल-कांस्टेबल।
क्यों छीने?
उनके आदतन शराबी होने के कारण हथियार हाथ में रहते वे नशे की हालत में उसका दुरुपयोग कर सकते हैं, इसलिए उन्हें हथियार देने पर पाबंदी लगाई गई है।
इन्हें हार्ड ड्यूटी पर क्यों नहीं लगाया जा रहा है?
वैसे तो पुलिस में सभी ड्यूटी हार्ड होती हैं, लेकिन फिर भी ऐसे पुलिसकर्मियों को संवदेनशील अथवा हथियार की जरूरत वाले स्थानों पर नहीं भेजा जा रहा है।
परेड भी नहीं कराई जाती है?
ऐसा नहीं है। परेड के लिए किसी को छूट नहीं दे रखी है। नशे के कारण कुछ जवान नहीं पहुंचते होंगे तो उनके खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान है।