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Chandigarh Chandigarh चंडीगढ़.
हिमाचल, उत्तराखंड और अन्य पहाड़ी राज्यों में नॉन मैन्युफेक्चरिंग और पैकेजिंग यूनिट्स को कर रियायतों का लाभ नहीं देने के केंद्र के फैसले से बेशक पंजाब, हरियाणा को कुछ लाभ मिलेगा, परंतु पंजाब इससे संतुष्ट नहीं है। मुख्य सचिव रमेश इंद्र सिंह और इंडस्ट्री विभाग के सचिव वी. के. जंजुआ ने कोई टिप्पणी करने से यह कहते हुए इनकार किया कि उन्होंने नोटिफिकेशन कॉपी नहीं देखी। उन्होंने इतना जरूर कहा कि इससे निश्चित रूप से पंजाब को कुछ फायदा होगा।
केंद्र ने हिमाचल में इंडस्ट्रियल यूनिट्स को केंद्रीय कर, इनकम टैक्स व सर्विस टैक्स जैसी रियायतें दे रखी है, जिससे पंजाब-हरियाणा में लगी औद्योगिक इकाइयों को नुकसान हो रहा है क्योंकि इनमें ऐसी व्यवस्था नहीं है। इन करों में से 30 फीसदी पंजाब को योजनाओं के जरिए वापस मिल जाता है। इसके अलावा इस माल पर बिक्री कर में आई गिरावट इससे अलग है। साफ है कि पंजाब को हर साल 1500 करोड़ से ज्यादा का चूना लग रहा है।
फायदा नहीं मिलेगा दोहरी चाल का :
18 जनवरी को लिए गए केंद्र के इस फैसले की गाज उन औद्योगिक यूनिट्स पर गिरेगी जो अपने माल की प्रोडक्शन तो पंजाब में करते हैं लेकिन बद्दी और आसपास के इलाकों में उन्होंने पैकेजिंग व बिलिंग यूनिट लगा रखे हैं। इससे उनके माल पर लगने वाले करों का लाभ न तो हिमाचल को मिलता है और न ही पंजाब या उस स्टेट को जहां प्रोडक्शन यूनिट हैं। करों का मुनाफा उद्योगपतियों को मिल रहा है। दवा कंपनियां और लघु इकाइयां सबसे ज्यादा प्रभावित होंगी।
हर साल घटती गई आमदनी
सैंट्रल कस्टम एंड टेक्सेशन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पंजाब में इंडस्ट्री से 02-03 में बतौर केंद्रीय कर 2657.86 करोड़ मिले थे, यह राशि अगले वर्ष 1897 करोड़, 05-06 में 819 करोड़, गत वर्ष 867.17 करोड़ रह गई। सितंबर, 2007 तक इसके 385 करोड़ तक रह जाने की संभावना थी।