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Chandigarh Chandigarh चंडीगढ़. पिछली बार की तरह इस बार भी पंजाब विभिन्न योजनाओं के लिए केंद्र से 700 करोड़ रुपए की धनराशि हासिल करने में नाकाम रहा है। वित्त विभाग के आंकड़ों के मुताबिक केंद्र सरकार से विकास योजनाओं के लिए हर साल पंजाब को 1300 करोड़ रुपए मिलते हैं परंतु खर्च नहीं कर पाने के चलते इसमें से आधी से ज्यादा धनराशि इस बार नहीं मिल पाई है।
यह सब देखते हुए राज्य के प्रमुख वित्त सचिव ने विभागों से वित्तीय स्रोतों को बर्बाद होने से रोकने और उन्हें बढ़ाने को ओर ध्यान देने को कहा है।
करोड़ों रुपए मिले, खर्च कुछ भी नहीं
खाली सरकारी खजाने का रोना रोने वाले अधिकारियों की प्रतिभा का आलम यह है कि कई महकमों को करोड़ों रुपए विकास के लिए मिले हैं, लेकिन खर्च फूटी कौड़ी तक नहीं हुई। हैरत यह है कि 80 फीसदी महकमे ऐसे हैं, जिनके प्रशासकीय सचिवों ने यह तक नहीं जाना कि योजनाओं पर पैसा क्यों खर्च नहीं हुआ।
इन्हीं नाकामियों पर मुख्य सचिव रमेश इंद्र सिंह ने अफसरों की क्लास ली है। एक अफसर ने विभागों में 50 फीसदी स्टाफ होने का रोना रोते हुए कहा, नीचे काम करने वाले कर्मचारी ही नहीं है तो काम किससे करवाएं। एक और अफसर का कहना था, ‘विजिलेंस को इतनी छूट दे रखी है कि अफसरों को काम करते हुए डर लगता है।’
इंसल्ट हो रही है आईएएस की, सुधरो
चीफ सेक्रेट्री इन दलीलों से सहमत नहीं दिखे। उन्होंने कहा, ऐसी समस्याएं केवल पंजाब में नहीं है और प्रदेशों में भी हैं। उन्होंने अफसरों से यह भी कहा कि पंजाब के आईएएस अफसरों की काम को लेकर इंसल्ट हो रही है, काम की ओर ध्यान देकर इसमें सुधार कीजिए। चीफ सेक्रेट्री ने योजनाओं की मॉनिटरिंग पर जोर देते हुए कहा कि हर महीने बैठक करके योजनाओं का जायजा लिया जाए।
कम नहीं हैं कारगुजारियां >> कार्यक्रम एजुसेट: कंप्यूटर से चार सालों में जुड़े मात्र 300 स्कूल जबकि हरियाणा ने जोड़े चार हजार स्कूल।
>> इन्फॉर्मेशन: 2200 सर्विस सेंटर खोले जाने थे, एक भी नहीं।
>> रूरल हैल्थ मिशन: 200 करोड़ का, खर्च बताने योग्य नहीं।
>> हॉर्टीकल्चर मिशन: योजना 100 करोड़, खर्च तीन करोड़।
ये हैं पंजाब के प्रशासकीय अफसरों की कारगुजारियों के कुछ नमूने। यही नहीं जवाहर लाल नेहरू अर्बन रिन्यूवल मिशन, सर्व शिक्षा अभियान, वल्र्ड बैंक की जन स्वास्थ्य जैसी कई ऐसी योजनाएं हैं, जिनमें अफसरों ने कुछ भी नहीं किया।