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कारंजी (चंदनपुर).
आज भी जहां समाज में अंतरजातीय विवाह को आसानी से स्वीकार नहीं किया जाता है और प्रेमियों को समाज के आगे या तो अपने प्यार की बलि देनी पड़ती है, या फिर घर छोड़कर भागना पड़ता है। ऐसे ही प्रेमी युगलों को चंदनपुर के कारंजी गांव में आसरा मिलता है।
कारंजी एक छोटा सा गांव है, लेकिन इसका दिल बहुत बड़ा है। गांव को यदि प्रेमियों का स्वर्ग कहा जाए, तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। समाज के विरोध का सामना करने के बाद अपने प्रेम को विवाह के बंधन में बांधने वाले तकरीबन तीन हजार से अधिक युगल यहां पर खुशीपूर्वक जिंदगी बिता रहे हैं।
मिली नई जिंदगी
दो महीने पहले अनिल विथोबा बोरमी और उनकी प्रेमिका चंद्राज्योति कोहापरे को अपने मिलन का एकमात्र रास्ता मौत ही नजर आ रहा था। दोनों ही अलग-अलग समुदायों से संबंध रखते हैं। दोनों ने आत्महत्या करने की पूरी तैयारी कर ही ली थी, लेकिन तभी उन्हें इस गांव के बारे में पता चला। अब दोनों यहां पर सुख-शांति के साथ अपनी जिंदगी बिता रहे हैं।
प्रेमनगरी प्रसिद्ध के रूप में चंदनपुर से ६५ किमी दूर स्थित करांजी एक ऐसा गांव बन गया है, जहां पर धर्म और समाज की खोखली मान्यताओं से ऊपर उठकर सिर्फ प्यार को सर्वोपरि रखा जाता है। एक हफ्ते पहले ही यहां पर अनिल और चंद्राज्योति की शादी हुई है। करांजी में इस तरह की यह ४क्वीं शादी थी। करांजी के उप सरपंच तुकेश वानोडे का कहना है कि यह गांव प्रेम नगरी के रूप में प्रसिद्ध हो रहा है। यहां पर जाति, धर्म का कोई बंधन नहीं है। उन्होंने बताया कि प्यार करने वाले प्रेमियों से बात करके ग्राम सभा उनकी शादी की तारीख तय करती है व शादी से पहले दोनों के परिवार वालों को राजी करने की कोशिश की जाती है।
एक-दूजे के लिए
यहां पर पिछले महीने ही प्रवात जाटव और पेरुता सोयम की शादी हुई है। प्रवात इंदौर के एक ठाकुर परिवार से ताल्लुक रखते हैं और प्रेरणा दूसरी जाति की बेटी है। इस शादी की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि पेरुता एक विधवा हैं और उनकी छह साल की एक बेटी भी है। प्रवात के रूप में उन्हें बहुत ही अच्छे और देखभाल करने वाले पति मिले हैं।
छह साल पहले शुरू हुआ था ट्रेंड इस गांव में प्रेमियों की शादी कराने का ट्रेंड छह साल पहले हुआ था। उस समय एक अंतरजातीय प्रेमी युगल के रोमांस के चलते काफी तनावपूर्ण हालात उत्पन्न हो गए थे। तब गांव के सभी बड़े-बुजुर्गो ने मिलकर दोनों परिवारों को समझाया और शादी के लिए तैयार कर लिया।
गांववाले करते हैं पूरी तैयारी यहां पर शादी कराने के लिए किसी कमेटी की जरूरत नहीं पड़ती है। साथ ही जिंदगी बिताने का फैसला कर चुके युगलों की शादी की सारी तैयारी गांववाले खुद ही करते हैं। अब यही ट्रेंड यहां के अन्य गांवों में भी फैल रहा है। गांव के सरपंच अब इस तरह की सामूहिक शादियां कराने की योजना बना रहे हैं।