संपादकीय. शेयर बाजार से तटस्थ किसी भी व्यक्ति के लिए यह देखना निश्चित ही रोचक होगा कि भारतीय शेयर बाजार उस समय भी बढ़ते रहे जब अमेरिकी सब प्राइम संकट के कारण दुनिया के ज्यादातर प्रमुख बाजार गिर रहे थे और उस समय अचानक ढह गए जब विश्लेषक अमेरिकी अर्थव्यवस्था से भिन्नता का सिद्धांत (डिकपलिंग थ्योरी) प्रतिपादित करने में लगे थे।
क्या इस गिरावट के बीज वाकई मुल्क से बाहर कहीं और हैं? वित्त मंत्री भी कह रहे हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था अब भी 9 फीसदी की दर से बढ़ रही है, कंपनियों के तिमाही मुनाफे अच्छे खासे हैं, भारत में सब प्राइम जैसा कोई संकट नहीं है और न ही हम अमेरिका को निर्यात पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं।
फिर क्या वजह है कि पिछले सात सत्रों में निवेशकों के हाथ से करीब 16 लाख करोड़ रुपए निकल चुके हैं। भले ही यह विपक्ष की ओर से कहा गया हो, लेकिन कठोर सच है कि कई लोग अपनी जमा पूंजी से हाथ धो बैठे हैं। वास्तव में यह वैश्विक मंदी के सिद्धांतों से ज्यादा भारतीय शेयर बाजार के प्रबंधन की विफलता का नतीजा है।
पिछले वर्षो में ढीले कायदे-कानूनों का फायदा उठाकर निवेशकों का बड़ा हिस्सा डेरिवेटिव निवेशक (मार्जिन जमाकर बिना डिलीवरी के कई गुना कारोबार करने वाला) बन गया है। इन निवेशकों ने ऐसे शेयरों में भी भारी-भरकम सौदे कर रखे हैं जिनके बुनियादी घटक उनके शेयर भाव से जरा भी मेल नहीं खाते हैं। आखिर केवल मार्जिन के आधार पर बाजार को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की भी एक सीमा है।
कहा जा रहा है कि मार्जिन के आधार पर निवेशकों ने करीब एक लाख करोड़ रुपए की लीवरेज पोजीशन ले रखी हैं। दुर्भाग्यवश, इन भारी-भरकम खरीदियों में संकट ऐसे समय पैदा हुआ है जब दुनिया के बाजारों में अफरा-तफरी मची है। अमेरिकी मंदी का संक्रमण यूरोप और एशिया तक फैल रहा है। चीन ने भी विकास दर का आंकड़ा संशोधित कर लिया है।
लिहाजा, विदेशी निवेशक दूसरे शेयर बाजारों के घाटे की भरपाई के लिए ऐतिहासिक ऊंचाई पर चल रहे भारतीय पूंजी बाजार में मुनाफा वसूली पर उतर आए। अब मुश्किल यह है कि बाजार में तत्काल कोई खरीदार नहीं है और ब्रोकर नई खरीदी की इजाजत नहीं दे रहे। कहा जा सकता है कि अब बाजार तभी उबरेगा जब निचले स्तर पर अच्छे शेयरों में निवेशक आएंगे।
भारतीय म्यूचुअल फंडों के पास तरलता की समस्या नहीं है। वे निचले स्तर का फायदा निश्चित ही उठाना चाहेंगे। यह बात जरूर है कि जिन्होंने एक समय मार्जिन कारोबार से फायदा उठाया था उनके सारे मुनाफे कुछ दिनों में धुल गए हैं।