बिजयनगर/अजमेर. भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने मंगलवार को मसूदा तहसील की शिखरानी ग्राम पंचायत के सरपंच दिलीप गहलोत को दो हजार रुपए रिश्वत लेते गिरफ्तार किया। ग्रामीणों ने सरपंच की गिरफ्तारी का विरोध करते हुए एक घंटे तक एसीबी टीम को घेरे रखा। पुलिस के दखल के बाद लोग शांत हुए। गहलोत ने इंदिरा आवास योजना के तहत निर्धनों की दी जाने वाली सहायता राशि का चेक देने के बदले ग्रामीण से रिश्वत ली थी।
एसीबी के एएसपी शरद चौधरी ने बताया कि मोखमपुरा निवासी सत्यनारायण वैष्णव ने रविवार को मामले की जानकारी दी थी। उसने बताया था कि शिखरानी सरपंच दिलीप गहलोत इंदिरा आवास योजना के तहत 25 हजार रुपए का चेक देने के लिए रिश्वत मांग रहा है। एक हजार रुपए उसने शनिवार को सरपंच को दे दिए, लेकिन वह ढाई हजार रुपए की मांग और कर रहा है। एसीबी ने शिकायत का सत्यापन कराया। सरपंच और सत्यनारायण के बीच लेनदेन की बातचीत टेप की गई।
पुष्टि के बाद सीआइ हीरासिंह चौहान की टीम ने स्वतंत्र गवाह बद्रीलाल और मनोहरलाल को साथ लेकर मंगलवार सुबह करीब साढ़े आठ बजे सरपंच गहलोत को पकड़ लिया। योजना के मुताबिक, सत्यनारायण रिश्वत की राशि ढाई हजार रुपए लेकर गांव में निर्माणाधीन मकान के पास दिए। सरपंच ने इसमें से पांच सौ रुपए सत्यनारायण को लौटा दिए, जबकि बाकी दो हजार रुपए मकान में काम कर रही चौदह वर्षीय मंथरा पुत्री ओमप्रकाश जोशी को देने को कहा। सत्यनारायण ने मंथरा को रुपए दे दिए।
इस बीच, सत्यनारायण के इशारे पर एसीबी टीम पहुंच गई। अफसरों ने मंथरा के स्वेटर की जेब से दो हजार रुपए बरामद किए। सत्यनारायण के पास से भी पांच सौ का नोट जब्त किया गया। इस बीच, गांव के लोगों ने गहलोत को एसीबी की गिरफ्त से छुड़ाने की कोशिश की। सरपंच समर्थकों का तर्क था कि गहलोत के पास से रिश्वत की राशि बरामद नहीं हुई है। करीब एक घंटे तक लोगों ने एसीबी टीम को रोके रखा। इंस्पेक्टर हीरासिंह चौहान ने बिजयनगर थाने से मदद मांगी। कुछ ही देर में पुलिस पहुंच गई।
पुलिसकर्मियों ने विरोध कर रहे लोगों को समझाया। माहौल एक बार फिर उस वक्त गरमा गया जब सरपंच गहलोत को लेकर एसीबी टीम गांव से रवाना होने लगी। पुलिस ने निष्पक्ष जांच का आश्वासन देकर लोगों को रास्ते से हटाया।एसीबी के एएसपी चौधरी ने बताया कि सरपंच दिलीप गहलोत को बुधवार को विशेष अदालत में पेश किया जाएगा।
फंसाने की साजिश
घूसखोरी के मामले में एसीबी की गिरफ्त में फंसे सरपंच दिलीप गहलोत ने कार्रवाई को राजनीतिक विरोधियों की साजिश करार दिया। गहलोत ने सत्यनारायण को विरोधियों का मोहरा बताया।