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ब्रोकर व इन्वेस्टर भिड़े

अजमेर.police सोमवार को लगे भारी झटके के बावजूद छोटे निवेशक मंगलवार को मजबूती व जोश के साथ बाजार में उतरे मगर दलालों की मार्जिन मनी के मोह ने उन्हें उबरने का मौका ही नहीं दिया। बिना बताए सौदा काट देने से गुस्साए निवेशकों की ब्रोकर से हाथापाई की नौबत आ गई। उस समय तो पुलिस की समझाइश से निवेशक शांत हो गए लेकिन शाम को कोतवाली पहुंच परिवाद दिया जिसकी जांच बुधवार को होगी।

सुभाष उद्यान मार्ग स्थित यूनिकॉन कम्पनी के टर्मिनल पर मंगलवार दोपहर क्लाइंट्स का ब्रांच मैनेजर से लिमिट बंद किए जाने को लेकर जमकर विवाद हो गया। क्लाइंट्स का तर्क था कि पैसा जमा होने के बावजूद उनका सौदा काट दिया गया और इसकी सूचना 3.45 पर दी गई जबमार्केट बंद हो गया । उन्होंने ब्रांच मैनेजर ललित गौड़ को इसके लिए आड़े हाथों लिया। करीब आधे घंटे तक विवाद चलता रहा।

नौबत हाथापाई तक आ पहुंची। निवेशकों का गुस्सा देखते हुए ब्रांच मैनेजर व कुछ निवेशकों ने कोतवाली पुलिस को सूचना दे दी। पुलिस ने समझाइश से मामले को शांत कराने की कोशिश की। गुस्साए 15 इंवेस्टर्स कोतवाली पहुंच गए और ब्रांच मैनेजर ललित गौड़ को अपने घाटे का जिम्मेदार बताते हुए एसआइ प्रद्युम्न सिंह को परिवाद दिया। एसआइ ने एएसआइ कैलाशचंद को मामले की जांच सौंपी है।

एएसआइ कैलाशचंद ने बताया कि प्रथम दृष्टया इसमें कोई क्रिमिनल अफेंस नहीं बनता फिलहाल वह बुधवार को मामले की पूरी तहकीकात करेंगे। इंवेस्टर्स का कहना है कि उनका पूंजी होने के बावजूद उनका सौदा काट दिया गया जो कि पूरी तरह से गलत है और इसकी सूचना कंपनी ने बाजार बंद होने के बाद उन्हें दी।दरअसल पैसा नहीं जमा करा पाने अन्य वजहों से कुछ टर्मिनल्स की लिमिट खत्म कर दी गई। ऐसे में वे इंवेस्टर्स जिन्होंने सौदे किए उनका समय पर पैसा नहीं पहुंच पाने से सौदा कट गया। यूनिकॉन की भी लिमिट खत्म होने के कारण वहां भी सौदा नहीं हो पा रहा था।

यह है सौदा कटना

समय पर पैसा नहीं मिलने से सौदा कट जाता है यानी खत्म हो जाता है। घाटे की मार्जिन मनी उस सौदे के लिए अदा किए गए रकम से काट ली जाती है। दरअसल ज्यादातर इंवेस्टर्स अपने कैश से ज्यादा का शेयर उठाते हैं। मार्केट में कोई उथल-पुथल होने की दशा में इंवेस्टर ने जितने का सौदा किया है उसका घाटा पूरा पैसा नहीं मिलने की दशा में उसमें से काट लिया जाता है। ऐसे में इंवेस्टर्स के हाथ न तो शेयर लगता है और न पैसा। लिमिट खत्म होने से कोई भी सौदा नहीं हो पा रहा था जिससे क्लाइंट्स गुस्साए और वे हमारी बात को समझने को तैयार नहीं हो रहे थे।
’-ललित गौड़, ब्रांच मैनेजर, यूनिकॉन

जब इंवेस्टर्स का पैसा जमा है तो सौदा नहीं कटना चाहिए था। दिल्ली में यूनिकॉन के ऑफिस से स्टॉक एक्सचेंज को पैसा नहीं भेजा गया जिसके लिए कंपनी की लिमिट खत्म हो गई और समय से पैसा नहीं पहुंचने के कारण ही हमारा शेयर कटा है। इससे यूनिकॉन के टर्मिनल पर 30-40 लाख रुपए निवेशकों ने बिना किसी गलती के खोए हैं। इसके विरुद्ध 15 निवेशकों ने कोतवाली में पहुंच परिवाद दिया है।
’-सुनील गर्ग, इंवेस्टर ,यूटीआइ कादूसरे दिन भी नहीं खुला टर्मिनल

यूटीआइ का टर्मिनल मंगलवार को भी नहीं खुला। दो दिन से बंद टर्मिनल पर बिना सूचना के लगे ताले से निवेशक परेशान हैं। इस टर्मिनल से दो सौ से भी ऊपर निवेशक जुड़े हुए हैं। ताला देख निराश हुए निवेशकों ने टर्मिनल के अधिकारियों से बात करनी चाही, लेकिन उनके फोन बंद मिले। कुछ ने कयास लगाया कि तालाबंदी के पीछे मार्केट में चल रही गिरावट है। हालांकि कारण चाहे जो भी हों अधिकारियों से संपर्क नहीं हो पाने और बिना किसी सूचना की बंदी से निवेशकों में आशंकाएं बढ़ रही हैं।





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