बीकानेर. बीकानेर को नगर निगम में तब्दील करने की घोषणा जल्दी ही होने वाली है लेकिन नगर निगम बनने के बाद शहर को मिलने वाली सुविधाओं में इजाफा होगा, इसे लेकर अभी भी लोगों में संशय हैं। हालात यह है कि नगर निगम का जब तक एक्ट ही लागू नहीं होगा तो इसका लाभ क्या होगा। हालांकि निगम बनने के बाद अनुदान बढ़ने की संभावना है लेकिन इसी क्रम में बढ़ने वाले अफसरों की संख्या से इस लाभ का भी फायदा नहीं मिलेगा।
इन सभी स्थितियों के मद्देनजर सामान्यतौर पर यही कहा जा रहा है कि बीकानेर को नगर निगम बनाने का फायदा तब तक नहीं है जब तक इसके संबंध में एक्ट लागू नहीं हो जाए। उल्लेखनीय है कि नगर निगम का एक्ट बनाने का प्रस्ताव मंत्रिमंडलीय समिति ने तो पारित कर दिया है लेकिन विधानसभा में अभी तक नहीं रखा गया है। इस स्थिति में किसी नगर निगम के लिए अलग से किसी तरह की सुविधाओं का निर्धारण नहीं हो सका है।
इस स्थिति में अगर निगम के पास अपने आय के स्रोत नहीं है तो हालात सुधरने की संभावना नहीं हैं। कई स्थानों पर निगम बनने के बाद भी नगर सुधार न्यास अधिक मजबूत है। इसकी वजह साफ है कि सुधार न्यासों के पास पैसा अधिक है जो उसे जमीन बेचने से मिल रहा है। निगमों के पास आय अर्जित करने का ऐसा कोई ठोस साधन नहीं है।
चुंगी वसूली की व्यवस्था समाप्त करने के बाद गृहकर से आस लगी थी वह भी नहीं रही और अब रजिस्ट्री पर आधा प्रतिशत सरचार्ज वसूली का नियम भी वापस लिए जाने पर चर्चा शुरू हो गई है। वर्तमान स्थितियों में भी नगर परिषद आर्थिक तंगी के हालात में है और जमीन बेचकर अपनी स्थिति को संतुलित रखने में लगा है। जानकारों का कहना है कि नगर निगम बनने के बाद भी स्थितियों में सुधार आने की कोई संभावना नहीं है। सिवाय इसके कि अधिकारियों की संख्या में इजाफा हो जाएगा।