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शिक्षक नियुक्तियां जांच के घेरे में

बीकानेर. शिक्षक नियुक्तियां तथा शिक्षण व्यवस्था में गड़िबड़ियों की शिकायतों पर प्रारंभिक शिक्षा विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य के तीन जिला शिक्षा अधिकारियों के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं। शिक्षा विभाग को बीकानेर व झुंझुनूं में नियुक्तियों में तथा सीकर में शिक्षण व्यवस्था में भारी गड़बड़ी की शिकायतें मिली हैं। राज्य सरकार ने मैरिट से नियुक्तियां करने तथा विधवा, विकलांग, एकल व विवाहित महिला को सुविधाजनक स्थानों पर लगाने के निर्देश दिए थे।

उप शासन सचिव डी.डी.चारण ने यह आदेश बीएसटीसी की नियुक्तियों से पहले ही जारी कर दिए थे लेकिन इन आदेशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाते हुए मनमाने पदस्थापन्न किए गए। उपनिदेशकों से तीनों जिलों की जांच करवाई जा रही है। पता चला है कि इन तीनों जिलों में डीईओ कार्यालय ने जम कर मनमानी की तथा अपने चहेतों और रसूख वालों की सिफारिशों को शहर के नजदीक की स्कूलों में नियुक्तियां दे दी।

दूसरे जिलों के अभ्यर्थियों को मैरिट में नीचे के होने के बाद भी सुविधाजनक स्थानों पर लगाया गया, जबकि उच्च मैरिट वालों का पदस्थापन्न शहर से सौ से डेढ़ सौ किलोमीटर दूर किया गया है। बीकानेर में 14 महिलाओं की तो पंचायत समितियां ही बदल दी गई, जबकि शिक्षा राज्य मंत्री ने अभ्यर्थी को उसी की पंचायत की स्कूल में नियुक्ति देने के आदेश दिए थे।

सूत्रों ने बताया कि सीकर में शिक्षण व्यवस्था में कार्यग्रहण नहीं करने पर कलेक्टर ने कुछ शिक्षकों को निलंबित कर दिया था। इससे परेशान अभ्यर्थी और शिक्षक नेताओं ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। उपनिदेशक चूरू को जांच के लिए सीकर भेजा गया है। उधर, बाड़मेर में भी नियुक्तियों में गड़बड़ी की शिकायतों की जांच वहीं के जिला कलेक्टर स्वयं करवा रहे हैं। राज्य के कई जिलों में शिक्षक नियुक्तियों में गड़बड़ी की शिकायतें मिली हैं।

कहां जाएंगे उच्च मैरिट वाले

शिक्षा विभाग की डिग्रियों की जांच में उलझे 5611 अभ्यर्थियों में से अनेक के अंक मैरिट में उच्च हैं लेकिन नजदीक के उच्च प्राथमिक स्कूलों में नई नियुक्तियां कर देने से उन्हें दूरस्थ क्षेत्र की स्कूलों में ही जाना पड़ेगा। नियुक्तियों में गड़बड़ी का सर्वाधिक खमियाजा इन शिक्षकों को भुगतना पड़ेगा। विभाग इस बार आउट ऑफ स्टेट की सभी डिग्रियों की जांच करवा रहा है।

इनमें बाहर के मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों की डिग्रियां भी शामिल हैं। जांच के चलते नियुक्तियां देरी से मिलने के कारण इन अभ्यर्थियों को ठेठ ग्रामीण क्षेत्रों में जगह मिलेगी। रिक्त पदों की व्यवस्था समय पर नहीं होने के कारण नियुक्तियों में करीब एक साल का विलंब हो चुका है।





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