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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur बिलासपुर. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का समरसता सम्मेलन धर्मांतरण रोकने का एक और प्रयास नजर आया। सरसंघ चालक केसी सुदर्शन ने भारतीय समाज में फैली रूढ़ियों को दूर करने और एक-दूसरे के प्रति आत्मीय व्यवहार की जरूरत बताई ताकि समाज का विघटन रोकने में मदद मिल सके।
धर्मातरण रोकने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए आरएसएस द्वारा हरेक प्रांत में सामाजिक समरसता सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। इसके तहत सर संघचालक श्री सुदर्शन के तीन दिनी बिलासपुर प्रवास और अभ्यास वर्ग का आज समापन हुआ। इस अवसर पर कोनी स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में सामाजिक समरसता की आवश्यकता पर विचार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि मूल कठिनाई जन्म के आधार पर जाति व्यवस्था है, जबकि वास्तव में कर्म के आधार पर उस पर विचार होना चाहिए।
भारतीय इतिहास में वैदिक काल से अब तक निम्न कुल में जन्म लिया व्यक्ति भी कर्म के आधार पर समाज को दिशा देने वाले मार्गदर्शक बने और श्रेष्ठत्व को प्राप्त हुए, वहीं ऊंचे कुल में जन्म लेने वाले व्यक्ति भी गलत कार्यो और आचरण की वजह से पतित हुए हैं। उन्होंने भारतीय समाज की एकता के लिए छुआछूत की भावना को दूर करने की जरूरत बताई।
उड्डपि में शंकराचार्य ने धर्म संसद में 'न हिंदु पतितोभवेत' का प्रस्ताव पारित किया। हमारी जिम्मेदारी है कि समरसता के उस भाव को समाज के हर वर्ग तक ले जाएं। भारतीय संस्कृति और सोच को दुनिया में अनूठा बताते हुए कहा कि आने वाले समय में भारत ही पूरी दुनिया का नेतृत्व करेगा, लेकिन इसे सबल बनाने के लिए सामाजिक समरसता जरूरी है।