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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur रायपुर.
सुंदरनगर-डगनिया तिराहे पर हथियारों का जखीरा मिलने के बाद हरकत में आई पुलिस ने सोमवार आधी रात से आज तड़के तक कई ठिकानों में दबिश दी और सप्लायर समेत नक्सलियों के तीन सहयोगियों को हिरासत में लिया। एक फरार है। पुलिस ने महिला के भिलाई स्थित निवास से 9 पिस्टल, 53 जिंदा कारतूस, पांच कट्टे और पांच लाख रुपए नगद और 13 मोबाइल जब्त किए हैं। चारों पर राजद्रोह का मुकदमा दर्ज किया गया है।
पकड़े गए लोगों में हथियारों से भरे बैग तिराहे पर छोड़ने वाली अय्यपानगर भिलाई निवासी केएस प्रिया (26), चौबे कालोनी स्थित वुमन वर्किग हास्टल में रहने वाली मीना चौधरी (24) और डीडीनगर निवासी स्वतंत्र पत्रकार प्रफुल्ल झा (63) पर नक्सलियों के साथी होने का पुलिस को शक है। प्रफुल्ल का बेटा प्रतीक झा फरार है। अलबत्ता दामाद विनोद चंद्राकर को पूछताछ के लिए हिरासत में रखा गया है। दरअसल हथियारों की बरामदगी के साथ ही पुलिस के हाथ ऐसा क्लू लगा जिससे तार जुड़ते गए और सुबह तक नक्सलियों के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हो गया।
आईजी वायकेएस ठाकुर और रायपुर एसपी अमित कुमार ने पत्रकारों को बताया कि हथियार प्रफुल्ल के घर से उठाए गए थे। केएस प्रिया उर्फ मालती की जिम्मेदारी थी कि वह प्रफुल्ल के डीडीनगर स्थित मकान से हथियारों से भरे बैग लेकर डगनिया चौक पहुंचे और दूसरी पार्टी के हवाले कर दे। सोमवार की शाम वह प्रफुल्ल के घर पहुंची और वहां उसके बेटे प्रतीक झा के साथ उसने सेंट्रो (सीजी04बी-4628) कार पर 91 देसी कट्टे और वायरलेस से भरे बैग लाद लिए।
उसके बाद दोनों सुंदरनगर-डगनिया तिराहा पहुंचे। वहां प्रतीक ने आठों बैग सड़क किनारे उतारे और प्रिया को निगरानी के लिए वहां छोड़कर चला गया। प्रिया से कहा गया था कि वह तब तक वहां रहे, जब तक दूसरी पार्टी आकर हथियार नहीं ले जाती। पुलिस के मुताबिक प्रतीक के जाने के बाद प्रिया को घबराहट होने लगी। घने रिहायशी इलाके में बैग पड़े रहने से लोगों का ध्यान बार-बार उनकी तरफ जा रहा था। इससे प्रिया की हड़बड़ाहट बढ़ गई।
उसने पास के एक पीसीओ से दूसरी पार्टी को फोन किया। प्रिया ने करीब 10 मिनट के भीतर दो काल किए। उसके बाद भी पार्टी नहीं आई। इधर, लावारिस बैग को लेकर बम की अफवाह फैल गई। इस अफवाह के आम होते ही पूरे इलाके में खलबली मच गई। प्रिया थोड़ी दूर पर खड़ी होकर सारा नजारा देख रही थी। खतरा भांपकर वह वहां से भाग निकली और सीधे मीना के हास्टल पहुंच गई। सूचना पर पुलिस ने बैग जब्त किए। उसी बैग से क्लू मिला। उसके बाद आधी रात बाद हास्टल में दबिश देकर पुलिस ने मीना चौधरी और प्रिया को हिरासत में ले लिया। मीना ने खुद को सामाजिक कार्यकर्ता बताकर वहां किराये पर कमरा ले रखा था। काफी मशक्कत के बाद प्रिया ने पुलिस को भिलाई स्थित अपने निवास का पता बताया। रायपुर पुलिस ने फौरन राजनांदगांव जिले के एसपी वीके चौबे को खबर दी। पुलिस की टीम ने रातों रात अयप्पानगर (फरीदनगर) में छापा मारकर पिस्टल, मोबाइल सेट, नकदी के अलावा भारी मात्रा में नक्सली साहित्य बरामद किया।
आईजी श्री ठाकुर ने बताया कि पूरे आपरेशन में रायपुर के अलावा दुर्ग-भिलाई और राजनांदगांव पुलिस ने टीम वर्क की तरह काम किया। रायपुर और राजनांदगांव के पुलिस अधीक्षकों के नेतृत्व में एडिशनल एसपी अजातशत्रु बहादुर सिंह व डीएसपी मनीष शर्मा काफी दिनों से शहर में नक्सली मूवमेंट पर नजर रखे हुए थे। जितने भी संदेही पकड़े गए हैं, उन पर पुलिस की पहले से निगाह थी। पुलिस ने बताया कि सेंट्रो कार का रजिस्ट्रेशन डीडीनगर निवासी सिद्धार्थ शर्मा के नाम पर है।
ऐसा पता चला है कि वह प्रतीक का दोस्त है। हास्टल से एक होंडा एक्टिवा(सीजी04सीएन-3014) भी बरामद की गई है। इसका रजिस्ट्रेशन प्रतीक झा के नाम पर है। बताते हैं कि प्रिया रायपुर आने पर इसी एक्टिवा का उपयोग करती थी। प्रिया ने अपने पति का नाम आरचंद्रा रेड्डी उर्फ रमेश उर्फ विजय रेड्डी उर्फ ब्रम्हे बताया। उसे पेशे से वकील बताया गया है, लेकिन पुलिस को शक है वह नक्सलियों का सिटी नेटवर्क संभालने वालों में से वह प्रमुख सदस्य है। हथियार उसी के जरिए नक्सलियों तक पहुंचाए जा रहे थे। वह फरार है, उसकी तलाश की जा रही है।
इनका जवाब पुलिस के पास नहीं
डगनिया तिराहे से हथियार किसे सप्लाई करना था।
हथियारों का जखीरा सप्लाई के लिए कहां से लाया गया था।
प्रफुल्ल झा की गतिविधियों पर कब से और कैसे शक हुआ।
प्रफुल्ल झा के दामाद की क्या भूमिका है।
प्रिया ने 5 लाख रुपए कहां से और क्यों जमा किए।
भिलाई में जब्त पिस्टल कहां सप्लाई करना था।