bhaskar Web English
HomeNewsChhattisgarhRaipur Raipur

पानी में गए छह करोड़

रायपुर. p नगर निगम ने गर्मी में पानी संकट से निपटने पर योजना पर काम शुरू कर दिया, लेकिन हर साल की तरह इस साल भी बड़ी राशि टैंकरों पर खर्च की जाएगी। विडंबना यह है कि समस्या के स्थायी समाधान के लिए करीब 300 करोड़ में 17 टंकियों के निर्माण की योजना सालभर से धूल खा रही है।

योजनाकारों का मानना है, पानी की अस्थायी व्यवस्था पर जितना खर्च हो रहा है, उतने से पानी टंकियां खड़ी की जा सकती थी, लेकिन योजनाओं की कछ़वा चाल की वजह से पानी पर पैसा पानी की तरह बहाना पड़ रहा है। निगम सीमा में शामिल 26 गांवों में समस्या ज्यादा है। वहां पाइपलाइन, टंकियां नहीं होने की वजह से सालभर टैंकरों से पानी दिया जा रहा है।

इन इलाकों में 39 ट्रक और ट्रैक्टर टैंकरों से पानी की आपूर्ति की जा रही है। इन गांवों को छोड़ दे तो शहर में मोवा सर्वाधिक समस्याग्रस्त इलाका है। गर्मी में हर साल यहां पानी के लिए मारामारी मचती है। ठंड में भी यहां पानी के लिए लोगों को टैंकरों का इंतजार रहता है। पिछले साल हंगामें के बाद विधानसभा जाने वाली पाइपलाइन से पानी देना शुरू किया गया तब हालात काबू मे आए फिर भी इस इलाके में 9 टैंकर रोज दौड़ रहे हैं।

17 टंकियों में से एक यही पर प्रस्तावित है, पर अभी तक काम शुरू नहीं हो पाया है। टंकी का निर्माण ही समस्या का स्थायी समाधान है। टाटीबंध में नल की पुरानी पाइपलाइन बिछी है और पानी की टंकी भी है। पर फिल्टर प्लांट से सप्लाई होने वाले पानी का प्रेशर राइजिंग मेन में बेहद कम हो जाता है जिससे यह पूरा इलाका बोरवेल के पानी पर निर्भर है। गर्मी के दिनों में बोर सूखने से टिकरापारा क्षेत्र में संजयनगर, संतोषी नगर, दुर्गानगर, मठपुरैना, सतनामी बस्ती में टैकरों से पानी सप्लाई की जाती है।

डब्ल्यूआरएस कालोनी में पानी की समस्या से निपटने चार टैंकर चल रहे हैं। भनपुरी में पानी टंकी बनने के बाद भी दो टैंकरों के जरिए सप्लाई की जा रही है। गद्रेवार्ड, गुरू गोविंद सिंह वार्ड, रानी लक्ष्मीबाई वार्ड, राजीव गांधी वार्ड आदि जगहों पर पानी के लिए दिन भर मारामारी मची रहती है। गर्मी में इन इलाकों में अन्य दिनों की अपेंक्षा टैकर की सप्लाई दोगुनी हो जाती है। गर्मी शुरू नहीं हुई और आज की स्थिति में रोजाना 60 टैंकर पानी की सप्लाई की जा रही है।

इस साल भी डेढ़ करोड़

पानी की समस्या को देखते हुए निगम ने पिछले साल के हिसाब से इस साल भी गर्मी के तीन महीनों में पानी सप्लाई के लिए करीब डेढ़ करोड़ का टेंडर किया है। निगम अफसरों के मुताबिक शहर का बड़ा इलाका अभी भी बोर के पानी पर निर्भर है। गर्मी में बोर सूखने पर टैंकरों से पानी सप्लाई के अलावा कोई चारा नही रहता।

17 टंकियां कब बनेंगी

जेएनएनयूआरएम योजना के तहत शहर के समस्याग्रस्त इलाकों में 17 पानी की बड़ी टंकियां बनाने की 303 करोड़ की योजना एक साल से कागजों पर है। न टंकियों का निर्माण शुरू हुआ है और न ही पाइपलाइन बिछाई जा रही है। अफसर बताते हैं कि हर काम का टेंडर हो गया है लेकिन शासन स्तर पर मामला अटका हुआ है। हरी झंडी मिलते ही काम शरू हो जाएगा।

कम हुआ खर्च

हर साल सवा करोड़ रुपए टैंकरों पर खर्च करने के बावजूद निगम के जल विभाग के अध्यक्ष रमेश सिंह ठाकुर का दावा है कि वास्तव में खर्च कम हुआ है। पुराने 54 वार्डे में से 48 टैंकर मुक्त हो चुके हैं। नए जुड़े गांवों में पानी का सिस्टम नहीं है इसलिए इन इलाकों में पानी पर ज्यादा खर्च हो रहा है। पिछली गर्मी में भी कुल राशि का 75 प्रतिशत मोवा, भनपुरी, सड्डू, हीरापुर, जरवाय संतोषनगर जैसे नए जुड़े इलाकों में पानी पहुंचाने में खर्च हुआ था।





अपने विचार यहां लिखें
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: