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9 साल बाद आई इंसाफ पाने

चंडीगढ़. जर्मनी की एक महिला ने ‘आउटरेजिंग द मॉडेस्टी ऑफ वुमन’ के एक मामले में 9 साल बाद इंसाफ लेने चंडीगढ़ आई है। इस जर्मन महिला ने आरबीआई के डिप्टी मैनेजर आर के शर्मा के खिलाफ ‘आबरू पर हमले’ (आउटरेजिंग द मॉडेस्टी ऑफ वुमन) का केस दर्ज कराया था।

वह अपने दोस्त के साथ गवाही के लिए मंगलवार को कोर्ट में पेश हुई। चीफ ज्यूडिशियल मैजिस्ट्रेट वाईएस राठौर की कोर्ट में जर्मन महिला और उसके दोस्त हर्बट का क्रॉस-एग्जामिनेश हुआ।

क्या कहा महिला ने : महिला ने कोर्ट में कहा कि अगस्त 1999 को वह अपने दोस्त हर्बट के साथ डॉलर कैश कराने आरबीआई-17 गई थी। वहां डिप्टी मैनेजर आर के शर्मा ने उसकी प्रॉब्लम सॉल्व कर दी। उसका कहना है कि जब उसका दोस्त काफी पीने गया तो अकेली पाकर शर्मा ने उससे उसकी सैक्सुअल लाइफ के बारे में पर्सनल क्वेश्चन पूछे। इतना ही नहीं उस दिन शाम को शर्मा ‘गुज्जर भवन’ सेक्टर-28 भी पहुंच गए, जहां वह ठहरी हुई थी।

शर्मा ने वहां भी गलत हरकत की। इस बात को लेकर उसकी शर्मा से झड़प हुई। महिला ने कोर्ट में कहा कि उसने पुलिस को मौके पर बुलाया और बाद में मामला दर्ज कर लिया गया। महिला के दोस्त हर्बट ने कोर्ट में कहा कि आरबीआई में जब यह घटना हुई थी उस समय वह कॉफी पीने गया था। जब वह बैंक से बाहर निकले तो महिला ने सारी घटना के बारे में उसे बताया। वहीं, आरके शर्मा ने कोर्ट में कहा कि उनपर लगाए गए सारे आरोप गलत है।

प्रशासन का शुक्रिया: जर्मन महिला ने टिकट, चंडीगढ़ में रहने का खर्चा और सिक्योरिटी प्रोवाइड करने के लिए प्रशासन का धन्यवाद किया है।

दो महीने तक किया था इंतजार : 1999 में महिला ने दो महीने तक इंतजार किया था, लेकिन आरोपी के कोर्ट में पेश न होने के चलते ट्रायल शुरू नहीं हुआ। इसके बाद महिला जर्मनी वापस चली गई।

महिला ने कोर्ट में अप्लीकेशन दे मांग की थी कि गवाही के लिए आने को एयर फेयर, सिक्योरिटी प्रोवाइड करे। कोर्ट ने जनवरी 2004 में यूटी प्रशासन को आदेश दिए थे लेकिन इन आदेशों पर कुछ न किया गया। इसके बाद सितंबर 2007 में दोबारा से आदेश दिए गए और प्रशासन ने सभी इंतजाम किए।





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