भिखीविंड. सीमावर्ती गांव गिलपन वासी किसान त्रिलोक सिंह के अचानक चार मुर्गे मरने से गांव में बर्ड फ्लू की दहशत फैल गई है। त्रिलोक सिंह ने बताया कि उसने शौकिया तौर पर कबूतर और 20 के करीब लड़ाकू मुर्गे पाल रखे हैं।
पहले उसके सभी मुर्गे सही सलामत थे, लेकिन शनिवार और रविवार की मध्यरात्रि को उसके चार मुर्गे अचानक बीमार हो गए और उनकी बीठ भी पतली होने लगी थी जो कुछ ही देर में मर गए। किसान ने इनकी जांच के लिए प्रशासन से गुहार लगाई है।
>> मामले की जांच के लिए टीम भेजी गई है।
परमिंदर सिंह, सीनियर वैटरनरी अफसर
मुर्गे को 70 डिग्री पर पकाएं, बर्ड फ्लू से बचें
तरनतारन. पश्चिम बंगाल में फैले बर्ड फ्लू से बचाव के लिए सिविल सर्जन डा. अमृत कौर ने स्वास्थ्य अधिकारियों की मंगलवार को बैठक बुलाई। इसमें उन्होंने बताया कि बर्ड फ्लू एच-5 और एन-1 वायरस से फैलता है, जोकि प्रवासी पक्षियों में अधिक पाया जाता है।
पक्षियों की देखभाल करने वाले कर्मी भी इसकी चपेट में आ सकते हैं। वायरस से बचाव के लिए हाथों में दस्ताने पहनने जरूरी हैं। मुर्गे के मीट को 70 डिग्री तक पकाने से वायरस खत्म हो सकता है। सिविल सर्जन ने कहा कि कोई भी वायरस की शिकायत होने पर सिविल अस्पताल से संपर्क कर सकता है।
स्वास्थ्य विभाग ने बर्ड फ्लू के खतरे से बचाव के लिए टीमें गठित कर दी हैं। इसके अलावा क्षेत्र में खराब मीट बेचने वालों पर छापेमारी की जाएगी। लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।