|
हस्तियों के हत्याकांडों की जांच हत्यारे की पहचान हो जाने के बाद भी अक्सर सचाई की तह तक नहीं पहुंच पाती है। स्वाभाविक रूप से सवाल उठता है कि आखिरकार उसके पीछे कौन था? क्या वह किसी एक व्यक्ति की कारगुजारी थी या फिर हत्यारा क्या किसी बड़ी साजिश का हिस्सा था?
यदि हत्यारे की भी मौत हो जाती है तो गुत्थी सुलझाना और भी मुश्किल हो जाता है। 1951 में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री लियाकत अली खान, 1963 में अमेरिका के राष्ट्रपति जॉन एफ केनेडी और 2007 में बेनजीर भुट्टो की हत्याओं के मामलों में ऐसा ही हुआ।
भारत में जनसंघ के नेता दीनदयाल उपाध्याय की हत्या के मामले में अदालत द्वारा आरोपी को बरी किए जाने के बाद उस समय बंबई हाईकोर्ट के जज वाईवी चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में एक जांच आयोग बैठाया गया। इस आयोग की जांच का निष्कर्ष किसी अलग नतीजे पर नहीं पहुंच सका।
1984 में हुई इंदिरा गांधी की हत्या की जांच के लिए एमपी ठक्कर आयोग का गठन हुआ। इस आयोग की रिपोर्ट अपनी शक की सुइयों के कारण मजाक का विषय बन गई। इसमें शक की एक सुई के निशाने पर इंदिरा गांधी के बेहद भरोसेमंद रहे आरके धवन थे। 1991 में राजीव गांधी की हत्या के बाद का घटनाक्रम भी अजीबोगरीब था।
राजीव हत्याकांड की जांच करने वाले जस्टिस जेएस वर्मा ने यह बेतुका तर्क देकर इस हत्या की साजिश के पहलू की जांच करने से इनकार कर दिया कि यह पुलिस का काम है। हालांकि पूर्व में हत्याकांडों की जांच करने वाले आयोगों ने साजिश के पहलू की भी जांच की थी। जस्टिस वर्मा ने अपनी रिपोर्ट को सुरक्षा में चूक के पहलू तक ही सीमित रखा और ऐसा करते हुए उन्होंने पुलिस व प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों की अकारण ही खिंचाई की।
साजिश के पहलू की जांच के लिए बाद में एमसी जैन आयोग बैठाया गया। जस्टिस जैन ने करीब छह साल का लंबा समय लेकर जो भारी-भरकम रिपोर्ट दी उसमें असंगत विवरण की भरमार है। यदि ट्रायल कोर्ट जस्टिस जैन द्वारा मांगे गए कागजात उन्हें नहीं देने पर अड़ी नहीं रहती तो संबंधित मुकदमा पटरी से उतर भी सकता था।
जॉन एफ केनेडी की हत्या की जांच अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस अर्ल वारेन की अध्यक्षता वाले आयोग ने की थी। उसकी रिपोर्ट की व्यापक आलोचना हुई थी। बीती 27 दिसंबर को हुई बेनजीर भुट्टो की हत्या की जांच में राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने ब्रिटेन के ख्यात स्कॉटलैंड यार्ड को शामिल कर अच्छा ही किया है। याद रहे कि 1951 में लियाकत अली खान की हत्या की जांच में भी स्कॉटलैंड यार्ड की मदद ली गई थी। उनकी और बेनजीर की हत्या में कई समानताएं हैं।
लियाकत की हत्या के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने इस घटना की गहराई से जांच कराने की मांग की थी। पाकिस्तान सरकार ने हत्या के 10 दिन के भीतर जस्टिस मुनीर और जस्टिस अख्तर हुसैन की अगुवाई में जांच आयोग बैठाया था। आयोग ने अपनी रिपोर्ट फरवरी 1952 में दे दी लेकिन उसका खुलासा अगस्त 1952 तक नहीं किया गया। आयोग यह पता लगाने में नाकाम रहा कि लियाकत की हत्या कथित हत्यारे अकबर ने किसी निजी खुन्नस के चलते की थी या फिर वह किसी बड़ी साजिश का हिस्सा था।
आयोग ने कहा, 'हमारी नजर में इस हत्या में साजिश के तीन पहलू हो सकते हैं जिनमें से दो तो एक-दूसरे से जुड़े हैं और तीसरा केंद्र सरकार और उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत की सरकार के पत्राचार से संबंधित है। लेकिन हम साजिश के इन पहलुओं और हत्यारे अकबर के बीच किसी संबंध का पता नहीं लगा सके हैं।'
आयोग ने इस बात का भी उल्लेख किया कि पहले पश्चिमी रंग-ढंग में रहने वाला अकबर दो साल की अवधि में पूरी तरह कठमुल्ला बन गया था। इसके बावजूद आयोग ने हत्यारे के उन्मादी होने की व्याख्या को स्वीकार नहीं किया और न ही यह माना कि हत्या की वजह प्रधानमंत्री की कश्मीर नीति या फिर हठधर्मिता थी।
रिपोर्ट में अधिकारियों की लापरवाही की कड़ी आलोचना की गई थी। इस रिपोर्ट की चौतरफा आलोचना हुई और आलोचना करने वालों में लियाकत के बेटे विलायत अली खान भी शामिल थे। बाद में पाकिस्तान सरकार ने मामले की जांच के लिए स्कॉटलैंड यार्ड के सीडब्लूई उरेन की नियुक्ति की।
उरेन की रिपोर्ट मुनीर की रिपोर्ट से बिलकुल अलहदा थी। उरेन ने कहा, 'मेरी जांच से पता चलता है कि लियाकत की हत्या में न तो कोई विदेशी हाथ था और न ही किसी पाकिस्तानी मंत्री का हाथ था जैसा कि कुछ अखबारों की खबरों में कहा गया था। मुझे यह कहने में कोई हिचक नहीं है कि इस हत्या की योजना उसने (अकबर ने) अकेले ही बनाई और अकेले ही इसे अंजाम भी दिया।
हत्या की मुख्य वजह कठमुल्लापन हो सकता है।' लियाकत हत्याकांड की जांच और बेनजीर हत्याकांड की जांच में एक बड़ा अंतर यह है कि पहले मामले में स्कॉटलैंड यार्ड की सहायता पुलिस जांच पूरी होने के बाद ली गई थी जबकि दूसरे मामले में यह मदद जांच के दौरान ही ली जा रही है। उम्मीद करनी चाहिए कि सचाई प्रामाणिक रूप से सामने आएगी।
-लेखक वरिष्ठ कानूनविद हैं।