Breaking News 
bhaskar Web English


HomeVichaar Vichaar

कुंबले की वाजिब शिकायत

संपादकीय. देश के अधिसंख्य क्रिकेटप्रेमी भारत की टेस्ट क्रिकेट टीम के कप्तान अनिल कुंबले के इस कथन से सहमत होंगे कि त्रिकोणीय एक दिवसीय मैचों के लिए भारतीय टीम की घोषणा का समय आदर्श नहीं है और टीम की घोषणा के तरीके से उन्हें निराशा हुई है। मनोविज्ञान की थोड़ी भी समझ रखने वाला व्यक्ति बता सकता है कि चयनकर्ताओं ने एक दिवसीय मैचों के लिए घोषित टीम में जिन तीन सीनियर बल्लेबाजों को बाहर रखने का फैसला किया है, उनसे भारत-आस्ट्रेलिया के बीच एडिलेड में खेले जाने वाले चौथे और अंतिम निर्णायक मैच में पूरे मनोयोग से खेलने की अपेक्षा करना सरासर ज्यादती होगी।

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के कर्ता-धर्ता अगर दूरदृष्टि से काम लेते तो टीम का चयन एडिलेड टेस्ट के आखिरी दिन तक सहजता से टाला जा सकता था और तब कुंबले को शिकायत करने का मौका नहीं मिलता। चयनकर्ताओं के पास सौरव गांगुली, राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण को टीम से बाहर रखने के अपने तर्क हो सकते हैं मगर जब भारतीय टीम पर्थ में ऐतिहासिक जीत दर्ज करने के बाद टेस्ट सीरीज को बराबर रखने के इरादे से एडिलेड के मैदान पर उतरने जा रही है तब इस आशय की घोषणा सरासर औचित्यहीन है।

वैसे चयनकर्ताओं का यह तर्क भी गले नहीं उतरता है कि उन्होंने भविष्य पर नजर रखते हुए एक दिवसीय टीम में युवा खिलाड़ियों को तरजीह दी है। आदर्श स्थिति में टीम के चयन का मानदंड भविष्य नहीं, वर्तमान होना चाहिए और यदि वर्तमान में सीनियर खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं तो उन्हें भविष्य की आड़ में बलि का बकरा बनाया जाना ठीक नहीं है।

यह बात हम टीम आस्ट्रेलिया से सीख सकते हैं जहां राष्ट्रीय टीम में आने के पहले युवा खिलाड़ियों को काफी मशक्कत करनी पड़ती है। वहां युवाओं को जगह देने के नाम पर किसी सीनियर खिलाड़ी को बाहर नहीं बैठाया जाता है। यह अलग बात है कि एक दिवसीय टीम से हटाए गए सीनियर खिलाड़ी चयनकर्ताओं के फैसले को एक चुनौती के रूप में लें और सीरीज बराबर रखने का लक्ष्य हासिल करने के लिए एडिलेड टेस्ट में अपना सब कुछ दांव पर लगा दें।

वे ऐसा करके न केवल सीरीज बराबरी पर ला सकते हैं बल्कि चयनकर्ताओं को भी करारा तमाचा लगा सकते हैं। सिडनी टेस्ट में अपने व्यवहार को लेकर आलोचना के शिकार बने आस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों का व्यवहार पर्थ में भले ही संयत रहा हो मगर एडिलेड में वे पहले जैसी आक्रामकता से शायद ही बाज आएं। फिर भी उम्मीद की जानी चाहिए कि भारतीय टीम एडिलेड में 2003-04 की टेस्ट जीत को दोहराने में कोई कसर नहीं रखेगी।





अपने विचार यहां लिखें
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: