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बेटियों ने दिया पिता की अर्थी को कंधा

जयपुर. ‘प्रिय बेटी, मुझे लगता है नारी सशक्तीकरण कहीं सिर्फ बातों में ही सिमट कर न रह जाए। इसे क्रियान्वित भी किया जाना चाहिए, इसलिए मैं चाहता हूं कि मेरे अंतिम संस्कार के सभी क्रियाकर्म तुम पांचों बेटियों के द्वारा होने चाहिए।’ यह पत्र करीब १३ वर्ष पहले जवाहर नगर निवासी चंद्र सिंह कोठारी ने पुत्री वर्षा को लिखा था।

गत 20 जनवरी को जब कोठारी का देहांत हुआ तो उनकी इच्छा के अनुसार अंतिम संस्कार की रस्में पांचों बेटियों ने पूरी कीं। दामाद डॉक्टर शिवम प्रियदर्शी ने कहा, ऐसा माना जाता है कि पुत्र के हाथों मुखाग्नि मिलने पर ही स्वर्ग की प्राप्ति होती है, लेकिन इन बेटियों ने इस धारणा को तोड़ा है। कोठारी के अंतिम संस्कार में न सिर्फ उनकी बेटियां, बल्कि नातिनें भी शामिल थीं।

इलाके में चर्चा : चंद्रसिंह कोठारी जवाहर नगर में समाजसेवा में सक्रिय थे। बेटियों द्वारा उनका अंतिम संस्कार करने की क्षेत्र में खासी चर्चा है। डॉ. शिवम ने बताया कि कोठारी 10 वर्ष से किडनी की बीमारी से पीड़ित थे। उन्हें दिन में चार बार डायलिसिस की जरूरत पड़ती थी। इसके अलावा उन्हें दो वर्ष से ब्लड कैंसर भी था। इसके बावजूद वे अकेले रहते हुए अपना काम खुद ही करते थे।





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