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बाड़मेर-जालोर में मिथेन का दोहन

बाड़मेर. रिलायंस एनर्जी लिमिटेड, रिलायंस नेचुरल रिसोर्सेज लिमिटेड एवं जिओ पेट्रोल इंटरनेशनल इंक ने भारत सरकार से कोल बेड मिथेन उत्पादन के लिए समझौता किया है। अधिक गहराई पर दबे लिग्नाइट से सीबीएम (कोल बेड मिथेन) दोहन के लिए बाड़मेर एवं जालोर जिले के दो ब्लाकों में अन्वेषण एवं उत्पादन कार्य शुरू होगा। इसके तहत पर्यावरणीय अनुमति के लिए फरवरी में जन सुनवाई होगी।

जिओ पेट्रोल इंटरनेशनल इंक बाड़मेर एवं जालोर में ब्लाक बीएस चार एवं पांच में सीबीएम दोहन गतिविधियां शुरू करेंगी। इसके तहत ब्लाक बीएस चार के 1168 वर्ग किमी क्षेत्रमें 8 कोर कुएं एवं 3 परीक्षण कुएं दो वर्ष की अवधि में खोदेगी। इनकी गहराई अधिकतम 1200 मीटर होगी। द्वितीय चरण में 15 पायलट कुएं दो वर्ष और खोदने की योजना है। दूसरे ब्लाक बीएस पांच में 739 वर्ग किमी इलाके में 8 कोर कुएं, 5 परीक्षण कुएं, 15 पायलट कुएं खोदे जाएंगे। इनकी गहराई 600 से 1200 मीटर होगी।

21.2 क्यूबिक मीटर मिथेन गैस

पहले ब्लाक में 8.8 बिलियन क्यूबिक मीटर तथा दूसरे ब्लाक में 12.4 बिलियन क्यूबिक मीटर गैस के भंडार हैं। इसमें से 40-45 फीसदी कोल बेड मिथेन का दोहन हो सकेगा। कोर कुएं की खुदाई पर 1.5 करोड़ एवं पायलट व परीक्षण कुएं पर 2.5 करोड़ रुपए व्यय होंगे। सीबीएम दोहन के लिए 2002 में एक कोर कुएं की खुदाई की गई थी, उसके नतीजे काफी अच्छे रहे थे।

सिंचाई में काम आएगा जल

सीबीएम दोहन के दौरान 1000 से 1200 गैलन जल का उत्पादन होगा। ट्रीटमेंट के बाद इसको सिंचाई में काम लिया जा सकेगा।

परत पर निर्भर मिथेन की मात्रा

वैज्ञानिकों के मुताबिक किसी भी कोयला क्षेत्र में मिथेन की मौजूदगी कोयला परतों की गहराई, मोटाई एवं गुणवत्ता पर निर्भर करती है। गहराई के साथ कोयले की गुणवत्ता बढ़ती है इसलिए आमतौर पर अन्वेषण कार्य के लिए ऐसे क्षेत्र का चयन किया जाता है जहां कोयले की परतें गहराई में हो।

जिओ पेट्रोल इंटरनेशनल इंक एवं अन्य कंपनियां सीबीएम दोहन के लिए पर्यावरणीय अनुमति हासिल करने के लिए फरवरी माह में जन सुनवाई का आयोजन करेगी। इसकी सूचना जिला प्रशासन को मिल गई है।
—चिरंजीलाल दायमा,अतिरिक्त जिला कलेक्टर, बाड़मेर





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