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Madhya Pradesh
Gwalior Gwalior ग्वालियर. अव्श्रिनी भट्ट अपहरणकाण्ड में पुलिस छह दिन बाद भी अंधेरे में ही हाथ-पांव मार रही है। शहर पुलिस को श्री भट्ट और उनके अपहरणकर्ताओं के बारे में कोई सुराग नहीं लगा है। उधर इंदौर पुलिस का क्राइम स्क्वाड उस ट्रैक को तलाशता रहा जिससे श्री भट्ट की कार धौलपुर तक पहुंची थी। एसटीएफ ने अपनी कार्रवाइयों को एकदम गोपनीय रखा है लेकिन सूत्र बताते हैं कि उनके हाथ महत्वपूर्ण सुराग लगा है।
उल्लेखनीय है कि 18 जनवरी को इंदौर के पीथमपुर में स्थित दवा कंपनी निकोलस पीरामल प्लांट के प्रेसीडेंट अव्श्रिनी भट्ट का अपहरण अज्ञात बदमाशों ने उस समय कर लिया था जबकि एक्सपोर्टेक 2008 में भाग लेने के बाद यहां से इंदौर के लिए कार द्वारा रवाना हुए थे। इनकी कार दूसरे दिन धौलपुर के निहालगंज थानाक्षेत्र में मिली थी। कार मिलने के बाद पुलिस ने व्यापारी के लापता होने को अपहरण माना और तलाश में जोर-शोर से जुट गई।
श्री भट्ट को ढूंढने के लिए स्पेशल टास्क फोर्स को लगाया गया। इंदौर और धौलपुर पुलिस भी उनका पता लगाने में जुट गई। ग्वालियर पुलिस जहां उन लोगों को खंगाल रही है जो पहले भी अपहरण की वारदातों में लिप्त रहे हैं। वहीं इंदौर का क्राइम स्क्वाड दो दिन से घाटीगांव में डेरा डाले हुए है। यह घाटीगांव से मुरैना और धौलपुर की ओर जाने वाले उस रास्ते को ढूंढ रहा है जिससे श्री भट्ट की कार को धौलपुर ले जाया गया होगा ।
उल्लेखनीय है कि घाटीगांव तक श्री भट्ट के मोबाइल फोन की अंतिम लोकेशन मिली थी। इससे पुलिस ने अंदाजा लगाया है कि घाटीगांव से अपहृत कर श्री भट्ट को धौलपुर ले जाया गया है। इस कयास के आधार पर इंदौर पुलिस ने घाटीगांव से मुरैना की ओर जाने वाले रास्तों के आसपास बसे गांव के निवासियों से श्री भट्ट की कार के बारे में पूछताछ की लेकिन इन लोगों से कोई खास सूचना नहीं मिल पाई।
इस बीच पुलिस के सामने चर्चा यह भी पहुंची है कि घाटीगांव तक एक कार ने श्री भट्ट का पीछा किया और रास्ते से ही उनकी कार को हाईजैक कर लिया। इस बीच पुलिस ने गोला का मंदिर थानाक्षेत्र की कुछ कॉलोनियों में तलाशी अभियान चलाया। पुरानी छावनी में सड़क पर बैरियर डालकर दिन भर वाहन चेकिंग चलती रही।